विजय दशमी की उपादेयता पर गोष्ठी संम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज—
स्वयं की बुराइयों को समाप्त करने की प्रतिज्ञा ले - आचार्य संजीव रूप जी(बदायूं)
सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं श्री राम -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य
गाज़ियाबाद। रविवार को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "विजय दशमी की उपादेयता" पर गोष्ठी का आयोजन गूगल मीट पर किया गया।यह कोरोना काल में परिषद का 109 वां वेबिनार था।
वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप जी (बदायूं) ने कहा कि वैदिक काल से ही भारतीय संस्कृति वीरता  व शौर्य की उपासक रही है।विजया दशमी केवल एक पर्व ही नही अपितु  इसे कई बातों का प्रतीक माना जाता है।दशहरें में रावण के दस सिर इन दस पापों के सूचक माने जाते है – काम, क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा,आलस्य, झूठ, अहंकार,मद और चोरी। इन सभी पापों से हम किसी न किसी प्रकार से मुक्ति चाहते हैं।समाज में दिनों-दिन बुराइयाँ व असमानताएँ भी रावण के पुतले कि तरह बड़ी होती जा रही है।हमें इन पर्वो को सिर्फ़ परंपरा के रूप में नही निभाना चाहिए हमें इन त्योहारों से मिले संकेत और संदेशों को अपने जीवन में भी उतारने का प्रयत्न करना चाहिए। यह अन्याय पर न्याय,असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि यह पर्व हमें संदेश देता है कि “अन्याय और अधर्म का विनाश" तो प्रत्येक स्थिति मे सुनिश्चित है।फिर चाहे आप दुनिया भर की शक्तियों और प्राप्तियों से संपन्न ही क्यो न हों, अगर आपका आचरण सामाजिक गरिमा या किसी भी व्यक्ति विशेष के प्रति गलत होता है तो आपका विनाश भी तय है। ”विजयादशमी न्याय,नैतिकता, सत्यता,शक्ति और विजय का पर्व है।श्री राम का संपूर्ण जीवन हमें आदर्श और मर्यादा की शिक्षा देता है कि हर व्यक्ति के जीवन में सुख-दुख तो आते-जाते रहेंगे क्योकि यह तो सृष्टि का अटल नियम है।लेकिन हमें अपना जीवन सब परेशानियों के होते हुए भी हिम्मत और आशा के साथ जीना है बल्कि इस जीवन को ईश्वर की देन समझ कर अपने जीवन को सार्थक बनाना है।सच्चे अर्थो में श्री राम सामाजिक समरसता के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य समाज हापुड़ के संरक्षक आनन्द प्रकाश आर्य  ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए विजय दशमी की शुभकामनाएं प्रदान की।
प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि असत्य पर सत्य की विजय  का प्रतीक दशहरा, विजयदशमी पर्व सिखाता है कैसे आप शक्ति के साथ भी मर्यादित रहें और धर्मनिष्ठ जीवन जियें।
प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि विजयदशमी के इस पावन पर्व पर हम सबको संकल्प लेना होगा कि देश और समाज की प्रगति के लिए हम अपनी सभी बुराइयों को भी रावण के पुतले के साथ सदा-सदा के लिए दहन कर देंगे और समाज व देश कि उन्नति के लिए कार्य करेंगे।
युवा गायिका दीप्ती सपरा,वीना वोहरा,डॉ रचना चावला,लाज वन्ती गिरधर,पुष्पा चुघ,देवेन्द्र आर्य,सुशांता अरोड़ा,शोभा सेतिया,मधु खेड़ा,प्रेमलता सरीन आदि ने गीतों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महेंद्र भाई,ईश आर्य(हिसार),ओम सपरा,राजेश मेहंदीरत्ता ने भी अपने विचार रखें।
प्रमुख रूप से देवेन्द्र गुप्ता,प्रकाश वीर शास्त्री,अंजू जावा,प्रदीप आर्य,संजय सपरा,पुष्पा शास्त्री, करुणा चांदना नरेश प्रसाद आदि उपस्थित थे।