मर्यादा में रहकर ही बन सकते हैं पुरुषोत्तम


ज्योति शर्मा 
(संगीत शिक्षिका)—  
विजयदशमी पर्व पूरे देश में बड़े चाव से मनाया जाता है। यह त्योहर है असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और अधर्म पर धर्म की विजय का। प्रभु श्रीराम जो कि विष्णु के सातवें अवतार के रूप में सर्वत्र पूजनीय हैं, उनका सम्पूर्ण जीवन जनमानस के लिए एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि मानव जीवन को कैसे जिया जा सकता है। वह एक आदर्श पुत्र, शिष्य और मित्र थे। सभी प्राणी एक ही ईश्वर की संतान हैं, यह श्रीराम ने केवल कहा ही नहीं वरन् इसे प्रमाणित कर के दिखाया।
चाहे गुरु वसिष्ठ के आश्रम में गुरु आज्ञा का पालन हो, आश्रम और गुरु की सेवा हो, सहपाठियों की सहायता करना हो, प्रत्येक कार्य को उन्होंने पूरी निष्ठा और लगन से संपन्न किया। गुरु विश्वामित्र जी के साथ वन में अनेक राक्षसों का संहार किया, गौतम ऋषि द्वारा शापित अहिल्या का उद्धार किया। मिथिला में शिव धनुष का भंजन करके जानकी का वरण किया।
उस काल में राजा को अनेक पत्नियां रखने की परंपरा थी किन्तु भगवान ने केवल एक बार ही विवाह किया। माता कैकेयी के वरदान और अपने पिता के वचन का मान रखने के लिए समस्त राजसी वैभव का त्याग करके बिना किसी संकोच के 14 वर्षों के लिए वन को ही अपना निवास स्थान बना लिया।
वन में भी उन्होंने क्षत्रिय धर्म के साथ मानव धर्म को पूर्ण निष्ठा से निभाया।
राजा का पुत्र होते हुए भी निर्धन केवट को अपना मित्र बनाया। एक साधारण मानव की तरह ही पत्नी की इच्छा पूरी करने हेतु स्वर्ण मृग के पीछे चले गए। पत्नी का हरण हो जाने पर भी धैर्य नहीं खोया कि रावण जैसे महाबली का सामना दो भाई किस प्रकार करेंगे। 
प्रेम का संदेश देने और अपने भक्त का मान बढ़ाने के लिए माता शबरी के जूठे बेर खाए। किसी राजा से सहायता मांगने के बजाय वन के भालू वानरों की सहायता से भीषण समुद्र पर सेतु निर्माण किया और अंत में दुराचारी रावण को उसके किए का दण्ड दिया।
ऐसा जीवन निश्चित रूप से कोई साधारण मानव तो नहीं जी सकता। राम जब अयोध्या में थे तो वह दशरथ और कौशल्या के पुत्र कहलाते थे, किन्तु जब 14 वर्षों के कठोर संघर्ष के बाद लौटे तो वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम कहलाए। अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने बड़े सरल सहज रूप से सम्पूर्ण मानव जाति को यह बताया कि जीवन संघर्ष का ही दूसरा नाम है बिना परिश्रम किए कोई भी महान नहीं बन सकता।
भगवान श्रीराम का विजयोत्सव मनाने हेतु वी एन भातखंडे संगीत महाविद्यालय गाजियाबाद के छात्र छात्राओं ने एक वीडियो तैयार किया है जो कि श्रीराम भक्ति के नृत्य गीत से परिपूर्ण है। महाविद्यालय के संस्थापक एवं निर्देशक पंडित श्री हरिदत्त शर्मा जी के मार्गदर्शन में बनाए गए इस वीडियो में लगभग 50 छात्र छात्राओं ने प्रतिभागिता की है।