निर्भीकता व निर्णायकता के पर्याय थे सरदार पटेल - डॉ आनन्द कुमार (पूर्व पुलिस महानिदेशक)


धनसिंह—समीक्षा न्यूज—    
145 वीं सरदार वल्लभ भाई पटेल जयंती सौल्लास सम्पन्न
अखण्ड भारत की संरचना सरदार पटेल ने की -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य
गाज़ियाबाद। शनिवार को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में 145 वीं सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर आर्य गोष्ठी का आयोजन गूगल मीट पर किया गया।उल्लेखनीय है कि सरदार पटेल का जन्म  गुजरात के नाडियाड में 31 अक्टूबर,1875 को हुआ था । संगठित भारत को बनाने में आपकी  विशेष भूमिका मानी जाती है।सरदार पटेल को भारत की 565 रियासतों का विलय करके अखंड भारत के निर्माण के लिए याद किया जाता है।यह कोरोना काल में परिषद का 112 वां वेबिनार था।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सरदार पटेल स्पष्ट एवं निर्भीक वक्ता थे।स्वतन्त्रता के बाद उन्हें उपप्रधानमन्त्री तथा गृहमन्त्री बनाया गया।गृहमन्त्री होने के कारण रजवाड़ों के भारत में विलय का विषय उनके पास था।सभी रियासतें स्वेच्छा से भारत में विलीन हो गयीं;पर जम्मू-कश्मीर,जूनागढ़ तथा हैदराबाद ने टेढ़ा रुख दिखाया। सरदार की प्रेरणा से जूनागढ़ में जन विद्रोह हुआ और वह भारत में मिल गयी।हैदराबाद पर पुलिस कार्यवाही कर उसे भारत में मिला लिया गया।यदि सरदार पटेल न होते तो हिंदुस्तान का वर्तमान रूप ऐसा न होता,हिंदुस्तान खण्ड खण्ड में विभाजित होता।रजवाड़ों रियासतों का हिंदुस्तान में विलय करने का श्रेय सरदार पटेल को ही जाता है।आज आवश्यकता इस बात की है कि हम आजादी का मतलब समझे और राष्ट्र की एकता अखण्डता की रक्षा का संकल्प लें।
मुख्य वक्ता डॉ आनन्द कुमार (पूर्व आई पी एस) ने कहा कि सरदार पटेल गंभीर चिन्तक,बहु आयामी,आदर्शवादी व व्यवहारिक व्यक्तित्व के धनी थे।राष्ट्र के प्रति उनका प्रेम अद्वितीय था।वर्ष 1928 में गुजरात में बारडोली सत्याग्रह हुआ जिसका नेतृत्व वल्लभ भाई पटेल ने किया।उस समय प्रांतीय सरकार किसानों से भारी लगान वसूल रही थी।सरकार ने लगान में 30 फीसदी वृद्धि कर दी थी।जिसके चलते किसान बेहद परेशान थे।वल्लभ भाई पटेल ने सरकार की मनमानी का कड़ा विरोध किया।बारडोली सत्याग्रह की सफलता के बाद वहां की महिलाओं ने वल्लभ भाई पटेल को 'सरदार' की उपाधि दी।अगर आजादी के बाद नेहरू की जगह प्रधानमंत्री सरदार पटेल बनते तो आज कश्मीर व अलगावाद की समस्या नहीं होती।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राष्ट्रीय कवि प्रो.सारस्वत मोहन मनीषी ने कहा कि सरदार पटेल के विचार से व्यक्ति की अधिक अच्छाई उसके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आंखों को क्रोध से लाल होने दीजिए और अन्याय का सामना मजबूत हाथों से कीजिए।निडर होकर अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने में सर्वदा आगे रहना चाहिए।साथ हीं उन्होंने "आज मेरे देश को फिर से पटेल चाहिए" कविता के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने पटेल की जगह नेहरू को प्रधान मंत्री बनवा कर अनर्थ किया।
प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि भारत के राजनीतिक एकीकरण में लौहपुरूष,भारत रत्न सरदार वल्लभ भाई पटेल जी के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने प्रभु श्री राम के आदर्श जीवन चरित्र को लिपिबद्ध कर सम्पूर्ण सृष्टि को "रामायण" का अनुपम उपहार देने वाले आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जयंती पर 
शुभकामनाएं दीं।
आशु कवि विजय गुप्त व मित्र संगम पत्रिका के संपादक प्रेम वोहरा के निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
युवा गायिका दीप्ति सपरा,संध्या पाण्डेय,मदन लाल गुप्ता,रविन्द्र गुप्ता,प्रतिभा सपरा,विमला आहूजा आदि ने गीतों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
प्रमुख रूप से आनन्द प्रकाश आर्य,देवेन्द्र गुप्ता,डॉ अनुराधा आनन्द ,मधु खेड़ा,सुरेश आर्य, आचार्य जीवन प्रकाश शास्त्री, यज्ञवीर चौहान,वेदप्रकाश आर्य, सुरेन्द्र शास्त्री,राजश्री यादव,नरेश प्रसाद आदि उपस्थित थे।