आपसी तालमेल से ही परिवार खुशहाल रहता है -स्वामी शान्तानन्द


धनसिंह—समीक्षा न्यूज—   
पारिवारिक सुख शांति पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न
क्षमा व सहनशीलता से ही परिवार बनता है -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य
गाज़ियाबाद। बुधवार को केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "पारिवारिक सुख शांति के उपाय" विषय पर आर्य गोष्ठी गूगल मीट पर आयोजित की गई।यह कोरोना काल में परिषद का 114वां वेबिनार था।
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि परिवार समाज की एक इकाई है।परिवारों से मिलकर ही समाज का निर्माण होता है।अगर परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ व खुशहाल होंगे,तो समाज भी खुशहाल होगा।पारिवारिक सुख और शांति के लिए परिवार के सदस्यों के मध्य आपसी स्नेह, विश्वास और सम्मान आवश्यक है।'जैसा बोएंगे, वैसा काटेंगे' के सर्वकालिक सत्य के आधार पर यह कहा जा सकता है कि हमारा जो व्यवहार दूसरों के प्रति होगा, वही हमें भी प्रतिफल में मिलेगा। अगर परिवार के सदस्य आपस में प्रेम से रहेंगे,मेलजोल से रहेंगे तो परिवार में भी सुख व शांति का वास होगा।
मुख्य वक्ता स्वामी शान्तानन्द आर्य (रोजड़ आश्रम, अहमदाबाद) ने कहा कि खुशहाल पारिवारिक जीवन के लिए आवश्यक है कि पहले शांति रहे।जहाँ शांति है वहाँ विकास है। जहाँ विकास है वहाँ सुख है। इसलिए अमूल्य शांति के लिए सबसे पहले हमें अपने आप को देखना होगा।अपने बारे में जानना होगा।शांति का सागर परमात्मा है।हम आत्माएँ परमात्मा की संतान हैं।जब हमारे अंदर शांति आएगी तो हमारा विकास होगा।धन-दौलत और संपदा से संसाधन खरीदे जा सकते हैं परंतु शांति नहीं।हम यही सोचते रह जाते हैं कि यह कर लूँगा तो शांति मिल जाएगी।आवश्यकताओं को पूरा करते-करते पूरा समय निकल जाता है और न तो शांति मिलती है और न ही खुशी।परिवार के मुखिया का व्यवहारिक व सामाजिक न होना,परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होना,
परिवार में बच्चों का लालन पालन ठीक से न होना,घर की गृहणी में सामाजिक व नैतिक मूल्यों की कम समझ,परिवार के सदस्यों में आपसी प्रेम का अभाव इन कारणों का निवारण कर परिवार की सुख शांति को बनाये रखा जा सकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्य नेता जवाहर भाटिया ने सभी का आभार व्यक्त किया साथ ही कहा कि परिवार में शांति के आधार आपसी तालमेल को बनाये रखना चाहिए।
प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि जिस परिवार के सदस्यों में तालमेल अच्छा होता है।एक दूसरे की भावनाओं को समझते है ।वहाँ सुख का वातावरण होता है ।ऐसा परिवार स्वर्ग के समान है जहाँ छोटे,अपनों से बड़ों का सम्मान करते है व बड़े अपने से छोटों की भावनाओं को समझते है।
प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि परिवार की सुख-शांति बनाए रखने के लिए परिवार में सभी को एक दूसरे के प्रति प्रेमभाव रखना चाहिए और एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए। स्वतंत्रता सेनानी भाई परमानन्द जी की जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।   
युवा गायिका दीप्ति सपरा,वीना वोहरा,कृष्णा गाँधी,रविन्द्र गुप्ता, उर्मिला आर्या,बिंदु मदान आदि ने गीतों के माध्यम से सभी को भावविभोर कर दिया।प्रमुख रूप से विमलेश बंसल, आनन्द प्रकाश आर्य,देवेन्द्र गुप्ता, सुरेश आर्य,यज्ञवीर चौहान,सुरेन्द्र शास्त्री आदि उपस्थित थे।