बच्चे जैसा देखते हैं वैसा ही सीखते हैं: दर्शानाचार्या विमलेश बंसल


धनसिंह—समीक्षा न्यूज
आर्य समाज ए टी एस इंदिरापुरम द्वारा महर्षि दयानंद पर ऑनलाइन गोष्ठी सम्पन्न
गाज़ियाबाद। सोमवार को आर्यसमाज ए टी एस एडवांटेज,इंदिरापुरम में आज हुए पंचम वेविनार के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री यशपाल शास्त्री जी ने महर्षि दयानन्द सरस्वती जी के बारे में बतलाते हुए धर्म के मार्ग पर चलने तथा अपने बच्चों को आर्यसमाज में लाकर संस्कारी बनाने पर जोर दिया वहीं उन्होंने महर्षि जी के जीवन की प्रमुख घटनाओं की चर्चा कर उन्हें याद कर श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षा श्रीमती दर्शनाचार्या विमलेश बंसल आर्या जी ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती जी का मात्र गुणगान कर कार्यक्रम करना ही पर्याप्त नहीं उनके जीवन को देखकर मान अपमान से ऊपर उठकर अपने जीवन को वैसा बनाने की आवश्यकता है,बच्चे जैसा देखते हैं वैसा ही सीखते हैं।सिखाकर नहीं दिखाकर बच्चों को प्रेरित करना चाहिए,हमें बच्चों के सामने अपने आप को एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए। बच्चे देश का भविष्य है।अपने बच्चों को कार्यक्रमों में साथ ला संस्कारी बनाना होगा।
प्रसिद्ध भजनोपदेशिका कविता आर्या सहित पंडित अनिल दत्त शास्ञी मेरठ,पं विवेकानन्द शास्त्री,शालिनी गोयल,प्रतिभा सपरा,विन्दु मदान,मधु सहगल आदि ने अपने भजनों से सबको भावविभोर कर दिया।
केंद्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय अनिल आर्य जी के धन्यवाद आशीष के साथ कार्यक्रम सफलता के साथ संपन्न हुआ।
प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि छोटे बच्चों को कुछ भी सिखाने की आवश्यकता नहीं होती है,वे तो जो कुछ भी बड़े करते हैं उसे ध्यान से देखते हुए  अपनी स्वाभाविक बुद्धि से ग्रहण करते है जाते हैं इसलिए उत्तम संस्कार देने के लिए बड़ों का कर्तव्य बनता है कि वे कोई भी ऐसा कार्य न करें जिससे बालक बुद्धि  पर बुरा असर पड़े।अच्छे कार्यों का अच्छा प्रभाव पड़ता है।
सुंदर उपस्थिति के साथ कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा।
इस अवसर पर मुख्य रूप से राष्ट्रीय महामंत्री महेन्द्र भाई,सौरभ गुप्ता,अभिषेक गुप्ता आदि उपस्थित रहे।