कोरोना काल में 128 वीं आर्य गोष्ठि संम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज

वैदिक संस्कृति से ही नैतिक मूल्यों की स्थापना सम्भव -डॉ कल्पना रस्तोगी

प्रदुषण मुक्ति के लिए यज्ञ व वृक्षारोपण आवश्यक-अनिल आर्य,राष्ट्रीय अध्यक्ष

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "वैदिक संस्कृति में नैतिकता के मोती" विषय व राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन गूगल मीट पर किया गया।परिषद का कोरोना काल में  128 वाँ वेबिनार था।

वैदिक विदुषी डॉ कल्पना रस्तोगी ने जोर देकर कहा कि वैदिक संस्कृति सर्वोत्तम है,इसके अनुसरण से ही नैतिक मूल्यों की रक्षा हो सकती है।उन्होंने कहा कि वैदिक संस्कृति में अनेकों महापुरुषों व आर्ष ग्रंथों के माध्यम से सद विचारों का प्रतिपादन होता रहता है जिससे नैतिकता बनी रहती है।आर्य समाज श्रेष्ठ लोगों का समूह है और श्रेष्ठता को नैतिकता की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है।वेद और आर्ष ग्रंथों के स्वाध्याय करने वाले व्यक्तियों का मन सर्वदा प्रफुल्लित रहता है और वे समाज व राष्ट्र के लिए समर्पित रहते है।नैतिकता की कमी से बच्चों में अशिष्टता पैदा हो रही है।बच्चों में अनैतिकता का एक कारण माता-पिता के पास समय का अभाव होना भी है।माता पिता वैदिक साहित्य का पठन पाठन करें और बच्चों में संस्कार का बीजारोपण करें तो बच्चों में नैतिकता का भाव बना रहेगा।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि प्रत्येक वर्ष भारत में 2 दिसम्बर को "राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस" के रूप में मनाया जाता है।यह दिवस उन लोगों की याद में मनाया जाता है,जिन्होंने 'भोपाल गैस त्रासदी' में अपनी जान गँवा दी थी।उन मृतकों को सम्मान देने और याद करने के लिये भारत में हर वर्ष इस दिवस को मनाया जाता है।हजारों लोगों की एमआईसी की जहरीली गैस के रिसाव के कारण मृत्यु हो गयी थी।इस दिन को मनाने का मुख्य  उद्देश्य है औद्योगिक आपदा के प्रबंधन और नियंत्रण के लिए जागरूकता फैलाना,साथ ही हवा,पानी और मिट्टी को प्रदूषित होने से बचाना और उनमें होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए अलग-अलग तरह से समाज में जागरूकता फैलाना है,हमें चाहिए कि इस दिन प्रदूषण कम से कम करने का संकल्प लें और पेड़ पौधे लगाए तथा घर घर यज्ञ करवाये।

कार्यक्रम अध्यक्ष आर्य नेत्री उर्मिला आर्या ने कहा कि केन्द्रीय आर्य युवक परिषद ने कोरोना काल को भक्तिमय कर दिया।स्वास्थ्य,अध्यात्म,वैदिक संस्कृति, महापुरुषों की जीवन गाथा आदि अनेकों विषयों के ज्ञान की गंगा में लोगों को तृप्त करने के लिए उन्होंने साधुवाद दिया।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि जब बच्चे को हमारे साथ की जरूरत थी तो हम पैसे के पीछे भागते रहे और संस्कार,शिष्टाचार व नैतिकता नाम की चीज उसे मिल ही नहीं पाई।नैतिक मूल्य भारतीय संस्कृति की पहचान हैं,जोकि हमें हमारे पुरखों से विरासत में मिली अनमोल धरोहर हैं। 

प्रधान शिक्षक सौरभ गुप्ता ने कहा कि  संपूर्ण विश्व में भारत की पहचान नैतिकता से है और नैतिकता का आधार वैदिक संस्कृति व आर्ष ग्रन्थों में वर्णन मिलता है।

गायिका दीप्ति सपरा,संध्या पांडेय,सुषमा बुद्धिराजा,रविन्द्र गुप्ता,जनक अरोड़ा,इंद्रा गुप्ता, ईश्वर देवी(अलवर),संतोष आर्या, रजनी गोयल आदि ने मधुर गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आर्य नेता आनन्द प्रकाश आर्य, सुरेश आर्य,यज्ञवीर चौहान,डॉ सुषमा आर्या,देवेन्द्र गुप्ता,संतोष शास्त्री,वीना वोहरा,प्रकाशवीर शास्त्री आदि उपस्थित थे।