वर्तमान समय मे वेदों की महत्ता व श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर गोष्ठी सम्पन्न



धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

महान गणितज्ञ रामानुजन भारत का गौरव थे-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

वेदों की प्रासंगिकता सार्वभौमिक व सर्वकालिक है-चन्द्रकान्ता आर्या(बंगलोर)

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "वर्तमान समय मे वेदों की महत्ता" व श्रीनिवास रामानुजन की जयंती के अवसर पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया। यह कोरोना काल में परिषद का 138 वां वेबिनार था।

वैदिक विद्धान चन्द्रकान्ता आर्या (बैंगलोर) ने कहा कि वेदों की प्रासंगिकता सार्वभौमिक व सार्वकालिक है।वेैदिक धर्म आत्मा से परमात्मा के गुणों का विचार, चिन्तन,उसकी स्तुति,प्रार्थना व उपासना सहित जप व कृतज्ञता व्यक्त करने को उसकी पूजा व उपासना मानता है जिसमें वेदों व वेदानुकूल ऋषिकृत ग्रन्थों का स्वाध्याय व उनका आचरण भी सम्मिलित है।वेद वर्तमान समय में भी प्रासंगिक एवं उपयोगी है और सदैव रहेंगे।अन्य मतों में असत्य मान्यताओं व सिद्धान्तों के होने के कारण भले ही वह प्रचलित रहें,इसके अनेक कारण हैं,परन्तु वह प्रासंगिक नहीं हैं। आने वाले समय में उनका प्रभाव धीरे धीरे समाप्त हो सकता है।जीव कर्म करने में स्वतन्त्र और अपने कर्मों के फल भोगने में परतन्त्र है।जो जैसा करेगा वैसा ही भोगेगा।संसार के सभी लोग वेदों का अध्ययन करें व ईश्वर प्रदत्त वैदिक धर्म का पालन कर अपने जीवन को सफल बनायें।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि भारत देश मे अनेकों प्रतिभावान व्यक्तित्व ने देश विदेश में भारत को गौरवांवित किया उन्हीं में से एक थे श्रीनिवास रामानुजन। वे एक महान भारतीय गणितज्ञ थे।इन्हें आधुनिक काल के महानतम गणित विचारकों में गिना जाता है।इन्हें गणित में कोई विशेष प्रशिक्षण नहीं मिला,फिर भी इन्होंने विश्लेषण एवं संख्या सिद्धांत के क्षेत्रों में गहन योगदान दिए।इन्होंने अपने प्रतिभा और लगन से न केवल गणित के क्षेत्र में अद्भुत अविष्कार किए वरन भारत को अतुलनीय गौरव भी प्रदान किया।ये बचपन से ही विलक्षण प्रतिभावान थे।इन्होंने खुद से गणित सीखा।इनके कार्य से प्रभावित गणित के क्षेत्रों में हो रहे काम के लिये रामानुजन जर्नल की स्थापना की गई है और आज के दिन उनकी जयंती के उपलक्ष्य में "राष्ट्रीय गणित दिवस" के रूप में मनाया जाने लगा।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आर्यनेत्री शकुंतला नागिया ने इस अवसर पर कहा की सृष्टि के आदि में परमेश्वर ने चार सर्वश्रेष्ठ आत्माओं को वेद का ज्ञान दिया।ऋग्वेद का ज्ञान अग्नि ऋषि को,यजुर्वेद का ज्ञान वायु ऋषि को,सामवेद का ज्ञान आदित्य ऋषि को,अथर्ववेद का ज्ञान अंगिरा को प्रदान किया। इन्हीं ऋषिओं की परम्परा से वेदों का शुद्ध ज्ञान आज हम को प्राप्त हो रहा है।इन चारों वेदों में प्रत्येक विषय का ज्ञान है।पुनरपि मुख्य रुप से ज्ञान,कर्म और उपासना ये तीन वेदों के विषय हैं।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा की हमारी सभ्यता, संस्कृति,विचार और दर्शन का मूल वेदों में निहित है।उन्होंने कहा कि वेद ज्ञान के स्रोत हैं और ये आर्थिक, सामाजिक,शैक्षिक तथा राजनीतिक क्षेत्रों में अग्रसर होने के साथ-साथ उच्च नैतिकता तथा नैतिक मानकों को बनाए रखने की दिशा में भी हमारा मार्गदर्शन करते हैं।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन की जयंती पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि देश के महान क्रांतिकारियों, संस्कृतियों वैज्ञानिकों व गणितज्ञों आदि से युवा पीढ़ी को परिचय करवाने की आज आवश्यकता है।जिससे युवा पीढ़ी प्रेरणा ले सके।

गायिका दीप्ति सपरा,राजेश मेहंदीरत्ता,डॉ रचना चावला,काशीराम आर्य,आशा आर्या,जनक अरोड़ा, रविन्द्र गुप्ता,ईश्वर देवी,किरन सहगल,उर्मिला आर्या, प्रवीना ठक्कर,राजश्री यादव, द्रोपदी तनेजा,आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से आनन्द प्रकाश आर्य,यशोवीर आर्य,डॉ आर के आर्य,कुमकुम खोसला,देवेन्द्र गुप्ता,संतोष शास्त्री, प्रकाशवीर शास्त्री,ओमप्रकाश नागिया,मधु बेदी,अर्जुन कालरा आदि उपस्थित थे।