सत्संग से आत्म साक्षात्कार" पर गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज     

खुद से खुद की मुलाकात कर तभी साक्षात्कार-डॉ. जयेन्द्र आचार्य (नोएडा)

अकेले में स्वयं को जानना भी है आवश्यक-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य 

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "सत्संग से आत्म साक्षात्कार" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया।

आर्ष गुरुकुल नोएडा के प्राचार्य डॉ जयेन्द्र आचार्य ने "सत्संग से आत्म साक्षात्कार" विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सत्संग का अर्थ है ईश्वर का संग। मनुष्य को सत्संग से अनेक लाभ होते हैं।इससे आत्मा के दुगुर्ण, दुर्व्यसन और दुःख दूर होते हैं। आत्मा का ज्ञान निरन्तर बढ़ता जाता है।ईश्वर के सान्निध्य में रहने से दुःख दूर तो होते ही हैं,आनन्द स्वरूप ईश्वर के सान्निध्य में आनन्द की अनुभूति होती है।मनुष्य जितनी अधिक मात्रा में सत्संग करेगा और उस सत्संग से प्राप्त विवेक को महत्व देगा उतना ही अधिक मात्रा में उसके काम - क्रोध आदि विकार नष्ट होंगे।बाद में सत्संग से जागृत विवेक को महत्व देने से वह विवेक ही तत्वज्ञान में परिवर्तित हो जाता है।फिर दूसरी सत्ता का अभाव होने से विकार रहने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सत्संग व उपासना दोनों का उद्देश्य व लक्ष्य समान है। दोनों के द्वारा हम ईश्वर व आत्मा की चर्चा व चिन्तन करते हुए ईश्वर से एकाकार होने का प्रयत्न करते हैं।ईश्वर व आत्मा दोनों का पृथक अस्तित्व व सत्ता है।दोनों मिलकर कभी एक नहीं होते परन्तु उपासना से दोनों में समीपता व निकटता स्थापित हो जाती है और जीवात्मा को ईश्वर के आनन्द का अनुभव व आनन्द की प्राप्ति हो जाती है।वैदिक विधि से उपासना करने का नाम ही सत्संग है।इसलिये कि उपासना में ही आत्मा व ईश्वर का मेल होता है।आत्मा को ईश्वर से मिलाने का उपासना के अतिरिक्त अन्य कोई उत्तम साधन नहीं है।कभी कभी अकेले में स्वयं से भी बात कर लेनी चाहिए।

स्वागताध्यक्ष आर्य समाज अशोक विहार,दिल्ली के प्रधान प्रेम सचदेवा ने कहा कि सत्संग से उपासना होती है और उपासना में ही आत्मा व ईश्वर का मेल होता है।आत्मा को ईश्वर से मिलाने का उपासना के अतिरिक्त अन्य कोई उत्तम साधन नहीं है।

गायिका प्रीति आर्या,अनु आर्या, कविता आर्या,किरण सहगल, रविन्द्र गुप्ता,प्रतिभा सपरा आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से प्रवीण आर्य (महामंत्री उत्तर प्रदेश), देवेन्द्र गुप्ता,जीवन लाल आर्य,आशा भटनागर,विजय हंस,सतीश शास्त्री,देवेन्द्र भगत,आनन्द प्रकाश आर्य,राजेश मेहंदीरत्ता, सौरभ गुप्ता,शिवम मिश्रा, चन्द्रकान्ता आर्या,उर्मिला आर्या आदि उपस्थित थे।