किसान आंदोलन बन सकता है जन-आंदोलन: सिकंदर यादव


धनसिंह—समीक्षा न्यूज

पिछले लगभग एक महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर प्रदर्शनरत किसान अपनी मांगे मनवाने तीनो बिलो को वापस करवाने हेतु पूरे दमखम के साथ डटे हुए हैं, उनकी संख्या व समर्थन निरंतर बढ़ता जा रहा है परंतु सरकार अभी भी असमंजस में नजर आ रही है, कभी तो इस आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश उनके आईटी सेल द्वारा की जाती है, कभी वो इसे सिर्फ पंजाब का आंदोलन बताकर इसकी ताकत को कम करना चाहती है परंतु अब तक के हालात देखकर ऐसा लगता है यदि सरकार ने जल्द ही कोई गंभीर कदम नहीं उठाए तो ये आंदोलन जन-आंदोलन में बदल सकता है क्योंकि पिछले 6 वर्षों में, खासकर नोटबंदी के बाद देश की अर्थव्यवस्था निरंतर गिर रही है जो करोना के बाद बिल्कुल खस्ता हालत है, आज देश में रोजगार का बड़ा संकट है, बांग्लादेश जैसे देश आज जीडीपी में हम से आगे हैं

देश के नौजवानों के आगे सबसे बड़ा प्रश्न उनकी रोजी-रोटी का है, व्यापारी खुद जीएसटी के कारण परेशान है और इन किसान कानूनों के कारण देश का किसान भी सड़कों पर है, आज जो किसान सड़कों पर हैं उसका ये असंतोष कृषि कानून पर तो है ही, परंतु कहीं ना कहीं इनके पीछे सरकार के द्वारा पूर्व में पूंजीपतियों के हित में किए गए कार्य भी हैं, जिस प्रकार मौजूदा सरकार लॉकडाउन के बावजूद एयरपोर्टों, बीएसएनएल, गेल, रेल आदि का निजीकरण करने की इच्छुक रही है, उसमें कहीं ना कहीं देश के किसानों में एक अविश्वास की भावना प्रबल होती जा रही है जो पूर्णता सही भी है और जैसा रवैया अभी तक सरकार का इस आंदोलन के प्रति रहा है उससे भी आक्रोश होना लाजमी है, सरकार ने जल्द ही यदि यह कानून वापस लेकर समाधान नहीं किया तो वह दिन दूर नहीं जब देश का नौजवान मजदूर व व्यापारी भी सड़कों पर आ जाएगा क्योंकि आज सोशल मीडिया के माध्यम से सारा देश व पूरी दुनिया इस पर नजर बनाए हुए हैं सरकार को यह नहीं सोचना चाहिए कि ये सिर्फ पंजाब के किसानों का आंदोलन है, इस आंदोलन में आम आदमी की भागीदारी भी निरंतर बढ़ती जा रही है ये जितना लंबा खींचेगा उतना ही इसमें भागीदारी बढ़ेगी

इतिहास गवाह है की दुनिया की बड़ी-बड़ी क्रांति छोटी-छोटी घटनाओं से शुरू होकर सत्ता परिवर्तन तक गई हैं, सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि इस आंदोलन में भाग ले रहे बहुत से लोगों ने उसे वोट दिया है और लोकतंत्र में जनता से बड़ा कुछ नहीं, यदि सरकार पूर्व में जल्ली कटटू व एससी-एसटी एक्ट पर अध्यादेश लेकर आई, इसी प्रकार इस कानून को वापस लेकर देश के किसानों नौजवानों का विश्वास बहाल करना चाहिए