354 वीं जयंती पर गुरु गोबिंद सिंह जी को किया नमन


धनसिंह-समीक्षा न्यूज    

गुरु गोबिन्द सिंह जी हिन्दू धर्म के रक्षक बन कर आये-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

जीवात्मा को अपने कर्मो से आयु,जन्म व भोग मिलता है-आचार्य चंद्र शेखर शर्मा(ग्वालियर)

गुरु गोविंद सिंह अदम्य साहस,शौर्य के प्रतीक होने के साथ ही विद्वानों के भी संरक्षक थे- माया प्रकाश

गाज़ियाबाद केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती व "आयु के पांच स्वरूप" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया।यह परिषद का कोरोना काल मे 154 वां वेबिनार था।

वैदिक विद्वान आचार्य चन्द्रशेखर शर्मा (ग्वालियर) ने कहा कि मानव जीवन में आयु का विचार,मंथन और जिज्ञासा का होना स्वाभाविक है।मेरे शरीर की कितनी आयु है?क्या आयु निश्चित है ? क्या मानव अपनी आयु घटा या बड़ा सकता है?आयु के संबंध में शास्त्रों का क्या संदेश है? मानव अपनी आयु कैसे बढ़ा सकता है?आयु के पाँच स्वरूप क्या हैं? ऐसे अनेक प्रश्नों का सरल,सुबोध और समुचित संप्रेरक समाधान अपनी ओजस्वी वाणी में आचार्य जी ने किया। महर्षि पतंजलि के योगदर्शन के एक सूत्र की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीवात्मा को अपने कर्म विपाक से जन्म(जाति),आयु और भोग प्राप्त होता है।भर्तृहरि ने आयु का वर्गीकरण किस प्रकार जागृत, स्वप्न,बाल,युवा,वृद्ध,रोग,सेवा आदि में कैसे किया है।इसकी उचित व्याख्या की है।वेदों में आयु से संबंधित मंत्रों की सारगर्भित विवेचना की।आचार्य जी ने संख्यात्मक आयु,कार्यात्मक आयु,प्रसन्नात्मक आयु,सुखात्मक आयु और आनन्दात्मक आयु की हृदयस्पर्शी पंचरूपात्मक व्याख्या को सुनकर श्रद्धालु श्रोतागण आत्मविभोर हो रहे थे।आचार्य जी ने अपनी सरस वाणी में रामायण, भगवद् गीता के पावन प्रसंगों के साथ महर्षि दयानन्द सरस्वती आदि शंकराचार्य,स्वामी विवेका नन्द आदि महापुरूषों के जीवन की प्रेरक घटनाओं,कार्यों और उपकारों का मनोहारी वर्णन किया।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने हिन्दू धर्म रक्षक गुरु गोविंद सिंह जी  की 354 वीं जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि गुरु गोविंद सिंह जी एक महान स्वतंत्रता सेनानी रहे साथ ही उन्हें कविताओ की भी रूचि थी। इनके त्याग,बलिदान व वीरता से ही मुगल अत्याचारों का  मुकाबला हो सका और हिंदुओ की रक्षा हो सकी।यह दिन गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के रुप में मनाया जाता है।उनके लिए शब्द प्रयोग किया जाता है की "सवा लाख से एक लड़ांऊ" उनके अनुसार शक्ति और वीरता के संदर्भ में उनका एक सिख सवा लाख लोगों के बराबर है।

सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के कोषाध्यक्ष पं मायाप्रकाश त्यागी(गाजियाबाद) ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि गुरू गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु थे।उन्होंने ही आदिग्रंथ साहिब को गुरु की गद्दी दी थी। गुरु गोविंद सिंह ने ही खालसा पंथ की स्थापना कर सिखों को पंच ककार दिये।वे साहस और शौर्य के प्रतीक होने के साथ ही विद्वानों के भी संरक्षक थे।यही कारण है कि उन्हें संत सिपाही भी कहा जाता था।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि कहा कि हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करना चाहिए।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि प्राणायाम में प्राण वायु को धीरे धीरे विस्तारित करें और दीर्घ  व स्वस्थ जीवन जियेंI

गायिका दीप्ति सपरा,किरण सहगल,रविन्द्र गुप्ता,विश्वबन्धु सचदेवा,मृदुला अग्रवाल,आशा आर्या,राजश्री यादव,डॉ नीलम महाजन,डॉ कल्पना रस्तोगी आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से आचार्य महेन्द्र भाई,आनन्द प्रकाश आर्य, यशोवीर आर्य,चन्द्रकान्ता आर्या,उर्मिला आर्या,आर पी सूरी,देवेन्द्र गुप्ता,कुसुम आर्या,डॉ रचना चावला,विकास भाटिया, राजेश मेहंदीरत्ता आदि उपस्थित थे।