वेदों में पर्यावरण विषय पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

पर्यावरण के प्रति श्रद्धा बनाने की आवश्यकता है-डॉ कल्पना रस्तोगी

प्राण रक्षा के लिये शुद्ध पर्यावरण अहम-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "वेदों में पर्यावरण" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया।यह परिषद का 148 वां वेबिनार था।

वैदिक विदुषी डॉ कल्पना रस्तोगी ने "वेदों में पर्यावरण" विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज कोरोना वायरस ने सभी को घरों मे कैद करके पर्यावरण को पुनः शुद्ध होने का अवसर दिया है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता व श्रद्धा पैदा करना समय की मांग है। वेदों में भी पर्यावरण के प्रति श्रद्धा व सुरक्षा पर बल दिया गया है।मनुष्य प्रकृति का जो नुकसान करता है उसकी क्षति पूर्ति करने की आवश्यकता है।इसके लिए अग्निहोत्र (यज्ञ) के माध्यम से अग्नि में विशिष्ट सामग्री की आहुति देकर वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा लाई जा सकती  है।यज्ञ प्रकृति को संतुलित व शुद्ध करता है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि शुद्ध प्राण वायु प्रत्येक प्राणी के जीवन के लिए आवश्यक है।सबका कर्तव्य बनता है की पर्यावरण को शुद्ध रखे पेड़ पौधे लगाए।स्वच्छता का ध्यान रखें।मांसाहार पर्यावरण के लिए खतरा है,हमें प्रकृति को शुद्ध व पवित्र बनाने के लिए शाकाहार को बढ़ावा देना चाहिए।बर्ड्स फ्लू भी जीव हत्या का ही प्रतिकार है। यदि हम जीव हत्या,मांसाहार को त्याग दे तो पर्यावरण स्वयं शुद्ध हो सकता है।

कार्यक्रम अध्यक्ष आर्य नेत्री मोहिनी देवी आर्या ने कहा कि यज्ञ परम्परा को घर घर अपना कर वातावरण शुद्ध बनाने का संकल्प लें।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि यदि पर्यावरण को शुद्ध रखना है तो आज वेद में बताए गए सात्विक आचरण का अनुसरण करना होगा।

योगाचार्य  सौरभ गुप्ता ने कहा कि वेद पर्यावरण की रक्षा करने का संदेश देते हैं।वेदों में पृथ्वी,जल आदि पंच तत्वों में संतुलन बनाए रखने का विज्ञान है। 

गायिका प्रवीना ठक्कर (मुम्बई), मधु आर्या,सविता आर्या,बिन्दु मदान,जनक अरोड़ा,रविन्द्र गुप्ता, देवेन्द्र गुप्ता,ईश्वर देवी (अलवर), प्रीति आर्या,प्रतिभा लवली, सुलोचना देवी,नरेश प्रसाद,इन्दु बत्रा,चन्द्र कांता आर्या,यशवीर आर्य(सिरसा) आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से आचार्य महेन्द्र भाई,आनन्द प्रकाश आर्य, यशोवीर आर्य,नरेन्द्र आहूजा विवेक,दुर्गेश आर्य, करुणा चांदना,कमलेश हसीजा,डॉ मनोज तंवर,डॉ रामचंद्र,यज्ञवीर चौहान,उर्मिला आर्या,आर पी सूरी,विकास भाटिया,राजेश मेहंदीरत्ता,डॉ रचना चावला आदि उपस्थित थे।