ईश्वरीय पूजा के वैदिक स्वरूप पर गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

ईश्वर देने वाला है लेने वाला नहीं है-आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी

एक निराकार ईश्वर ही उपास्य देव है-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "ईश्वरीय पूजा का वैदिक स्वरूप" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन जूम पर किया गया।यह परिषद का 147 वां वेबिनार था।

वैदिक विद्धवान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी ने "ईश्वरीय पूजा का वैदिक स्वरूप" विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदों में ईश्वर को एक और निराकार बताया गया है।ईश्वर के अनगिनत गुण है। ईश्वर का प्रत्येक नाम उसके प्रत्येक गुण का दर्शन करवाता है।ईश्वर के अनगिनत गुण होने के कारण अनगिनत नाम है।ईश्वर ने हमें सब कुछ दिया है उसको कुछ चढ़ावा चढ़ा कर हम पूजा नही कर सकते। ईश्वर की पूजा देने में नही ईश्वर से लेने में है ईश्वर ने जो ज्ञान वेदों के माध्यम से प्राणी मात्र के लिए दिया है उसका अनुसरण करना ही सच्चे अर्थों में ईश्वर की पूजा करना है।ईश्वर की स्तुति,प्रार्थना व उपासना करने से ही ईश्वर से मिलन सम्भव है।उन्होंने कहा कि हमें आध्यात्मिक आंगन का खिलाड़ी बनने की आवश्यकता है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि केवल एक ईश्वर ही उपास्य देव हैं और मूर्ति पूजा और अवतारवाद वेद संगत नहीं हैं।हमें वेदों की आज्ञा का पालन करना चाहिए।आज हिन्दू समाज मुख्यत: मूर्ति पूजक समाज बन गया हैं,कोई मूर्तियों को ईश्वर पर ध्यान केन्द्रित करने का साधन बताता हैं तो कोई यह तर्क देता है की प्राण प्रतिष्ठा के पश्चात ईश्वर स्वयं मूर्तियों में विराजमान हो जाते है ये धारणा गलत है।वेदों में केवल और केवल एक ही ईश्वर की उपासना का विधान हैं वह सर्वज्ञ,सर्वान्तरर्यामी,निराकार है उसी की उपासना किया करें।

आर्य नेता सुरेन्द्र बुद्धिराजा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि आर्यसमाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती ने ईश्वर के सत्यस्वरूप का अनुसंधान किया और ऐसा करते हुए उन्होंने वेदों में वर्णित ईश्वर के सत्यस्वरूप व उसके गुण-कर्म-स्वभाव को यथार्थरूप में बताया।इसके लिए सत्यार्थ प्रकाश पढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि “न तस्य प्रतिमा अस्ति “अर्थात उस परमात्मा की कोई प्रतिमा नहीं है, का प्रमाण मूर्ति पूजा के विरुद्ध आदेश हैं।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि वैदिक काल में निराकार ईश्वर की पूजा होती थी जिसे कालांतर में मूर्ति पूजा का स्वरुप दे दिया गया।

गायिका सुदेश आर्या,दीप्ति सपरा,सविता आर्या,किरण सहगल,रविन्द्र गुप्ता,वेदिका आर्या,ईश्वर देवी (अलवर),विश्व बन्धु सचदेवा,जनक अरोड़ा, प्रतिभा कटारिया आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मुख्य रूप से आनन्द प्रकाश आर्य,धर्मपाल आर्य,ईश कुमार आर्य,नरेन्द्र आहूजा विवेक, उर्मिला आर्या,देवेन्द्र गुप्ता,राजेश मेहंदीरत्ता,यज्ञवीर चौहान,करुणा चांदना,वीना वोहरा,गीता गर्ग आदि उपस्थित थे।