ओंकार ध्वनि ॐ के साथ विद्यार्थी करते हैं विद्या की शुरूआत



धनसिंह—समीक्षा न्यूज

गौतमबुद्ध नगर। विद्या नगर स्थित सैंट हुड कॉन्वेंट स्कूल दादरी में बोर्ड के विद्यार्थियों एवं शिक्षकगण मिलकर ओंकार ध्वनि के साथ दिन एवं बेहतर शिक्षा की शुरुआत करते हैं। कोरोनावायरस कोविड-19 वैश्विक महामारी से निपटने में इस मंत्र को शक्ति के रूप में प्रयोग किया जा रहा है । विद्यालय प्रधानाचार्या डॉ आशा शर्मा ने विद्यार्थियों को बताया कि ओंकार ध्वनि 'ॐ' को दुनिया के सभी मंत्रों का सार कहा गया है। यह उच्चारण के साथ ही शरीर पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ती है। भारतीय सभ्यता के प्रारंभ से ही ओंकार ध्वनि के महत्व से सभी परिचित रहे हैं। उप प्रधानाचार्या नीलम शर्मा ने बताया शास्त्रों में ओंकार ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है। कोर्डिनेटर प्रिया वर्मा ने कहा कई बार मंत्रों में ऐसे शब्दों का प्रयोग किया गया है जिसका कोई अर्थ नहीं होता लेकिन उससे निकली ध्वनि शरीर पर अपना प्रभाव छोड़ती है। एक्टिविटी इंचार्ज एवं हिंदी शिक्षिका हेमलता शिशौदिया ने बताया कि हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है और ॐ मंत्र का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है। इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है। इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है। हमें प्रातः उठकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करना चाहिए इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा ।शब्दों से उत्पन्न ध्वनि से श्रोता के शरीर और मस्तिष्क पर सीधा प्रभाव पड़ता है। बोलने वाले के मुँह से शब्द निकलने से पहले उसके मस्तिष्क से विद्युत तरंगें निकलती हैं। इन्हें श्रोता का मस्तिष्क ग्रहण करने की चेष्टा करता है। उच्चारित शब्द श्रोता के कर्ण-रंध्रों के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचते हैं। इस तरह मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर अमृत की तरह आल्हादकारी रसायन की वर्षा करती है।