विश्वविद्यालय व भाखा संस्थान में भाखा महोत्सव 2021 आयोजित



धनसिंह—समीक्षा न्यूज    

नोयडा। लखनऊ विश्वविद्यालय व भाखा संस्थान सूरत के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित भाखा महोत्सव 2021 में अवधी में उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान व उसके संवर्द्धन हेतु अवधी साहित्यकार विनय विक्रम सिंह को डॉ कैलाश देवी सिंह सम्मान से वरिष्ठ साहित्यकार सुधाकर अदीब पू.नि. हिन्दी भाषा संस्थान तथा स्वयं प्रो. कैलाश देवी सिंह, पू. हिन्दी विभागाध्यक्ष, ल.वि. व डॉ गंगाप्रसाद गुणशेखर ने विभूषित किया। समारोह में आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित, सभापति हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, डॉ राज नारायण शुक्ल, कार्यकारी अध्यक्ष उ.प्र. भाषा संस्थान, प्रो. सदानन्द गुप्ता, उ.प्र. हिन्दी संस्थान, डॉ विद्या विन्दु सिंह, पू. संयुक्त निदेशक, उ.प्र. भाषा संस्थान, प्रो. अलोक राय, कुलपति लखनऊ विश्वविद्यालय, शिवमूर्ति, विख्यात कथाकार, डॉ आकांक्षा दीक्षित, जिला समाज कल्याण अधिकारी, अशोक कुमार शुक्ल, सहायक आयुक्त, राजस्व विभाग, महेंद्र प्रताप अवस्थी, रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय, ज्ञानेश्वर तिवारी, आई.पी.एस, पू. निदेशक की मनीषी उपस्थिति रही। 

समारोह में अवधी के साहित्यिक उत्थान हेतु अन्य मनीषियों को भी सम्मानित किया गया। जिनमे 'जगदीश 'पीयूष' सम्मान - डॉ राम बहादुर मिसिर, 'महाकवि तुलसी सम्मान' - खुशीराम द्विवेदी 'दिव्य', 'अवधी अग्रदूत पढ़ीस सम्मान' - चन्द्र प्रकाश पाण्डेय, 'वंशीधर शुक्ल सम्मान' - सतीश आर्य, 'चंद्र भूषण त्रिवेदी 'रमई काका सम्मान - फारूक 'सरल', 'लक्ष्मण प्रसाद 'मित्र 'सम्मान' - अजय प्रधान, 'श्याम सुंदर मिश्र 'मधुप' - डॉ.रमेश मंगल बाजपेई, 'माता प्रसाद 'मितई' - नन्दीलाल निराश, 'महाकवि जायसी सम्मान' - आलोक सीतापुरी (योगेन्द्र बहादुर सिंह), 'गीजू भाई बधेका सम्मान - झनकार नाथ शुक्ल, 'प्रो हरिकृष्ण अवस्थी सम्मान - प्रोफेसर अलका पाण्डेय, 'प्रोफेसर सूर्य प्रसाद दीक्षित अलंकरण' - डॉ विनय दास, 'डॉ विद्याविंदु सिंह अलंकरण' - श्रीमती कुसुम वर्मा, 'डॉ आनन्द कुमार अलंकरण' - आरडी वर्मा, महाकवि जगनिक सम्मान - प्रोफेसर पवन अग्रवाल, महाकवि गुरु प्रसाद सिंह 'मृगेश' सम्मान - प्रोफेसर योगेन्द्र प्रताप सिंह, रफ़ीक शादानी सम्मान -रामशंकर वर्मा, इंद्रेश तिवारी 'बौड़म लखनवी' - रमेश दुबे, आचार्य राम चंद्र शुक्ल आलोचना सम्मान - डॉ शैलेंद्र कुमार शुक्ल, सुशील सिद्धार्थ सम्मान - प्रकाश जैसे विशिष्ट लोक भाषा के साधक अलंकृत हुए।

समारोह में भाखा त्रैमासिक पत्रिका व लोकभाषा के ख्यात साहित्यकार नंदी लाल 'निराश' द्वारा रचित 'आँगन की दीवारों से' तथा सतीश आर्य द्वारा रचित 'महुआरी', अजय प्रधान द्वारा रचित, 'ठकुराइन कै समोसा' का लोकार्पण भी हुआ।

समारोह का समापन आचार्य सूर्य प्रसाद दीक्षित, सभापति हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग, द्वारा दिये गए अध्यक्षीय वक्तव्य से हुआ, अंत में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति अलोक राय द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया।