ऋतु अनुसार आहार विहार स्वास्थ्य के लिए आवश्यक-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य



धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "बिना दवाइयों के  कैसे रहें स्वस्थ" विषय पर आर्य गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन ज़ूम पर किया गया। यह परिषद का कोरोना काल में 189 वां वेबिनार था।

मेदान्ता अस्पताल गुरुग्राम के डॉ. सुनील आर्य ने कहा कि बिना भूख के भोजन या अधिक भोजन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।  उन्होंने प्रकाश डालते हुए कहा कि पेट की अग्नि यानि जठराग्नि के अलावा भी 12 प्रकार की अग्नि शरीर के अलग-अलग अन्य पाचन के कामों के लिए जिम्मेदार होती हैं। सात धातु अग्नि धातुओं के निर्माण के लिए जिम्मेदार होती हैं, 5 भूत अग्नि अलग-अलग तत्वों का एकीकरण करती हैं। ये अग्नि पाचन की क्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और पोषक तरल, दोष, धातु और मल का निर्माण करती है। यह बहुत जरूरी है कि जठराग्नि का संतुलन बना रहे,साथ ही उन्होंने कहा कि भूख से कम और समय पर भोजन करना,रिफाइंड ऑयल न ले, सरसों तेल का,शुद्व घी का सेवन करें,व्यायाम,आहार,विहार विचार और व्यवहार आदि पर ध्यान देकर स्वास्थ्य लाभ लिया जा सकता है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आयुर्वेद में,स्वस्थवृत्त के अन्तर्गत देश,काल,ऋतु और प्रकृति के अनुरूप आहार-विहार का वर्णन किया गया है।स्वस्थ मनुष्य के स्वास्थ्य की रक्षा करना तथा देश, काल,ऋतु प्रकृति के अनुसार उसके आहार-विहार का पालन करना आयुर्वेद प्राचीन काल से हमें सिखाता आ रहा है। आज दिन और रात्रि तथा विभिन्न ऋतुओं के आचरण के बारे में हम सभी भूलते जा रहे है जिसका पालन करने से जीवन सुखमय हो सकता है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के कोषाध्यक्ष देवेन्द्र गुप्ता ने कहा कि स्वस्थ रहने के लिए अच्छी मात्रा में शुद्ध वायु का ग्रहण करें जिसके लिए प्रतिदिन सैर करना चाहिए।

कार्यक्रम अध्यक्ष आर्य नेत्री विमला आहूजा ने कहा कि स्वस्थ रहना सबसे बड़ा सुख है। कहावत भी है- 'पहला सुख निरोगी काया'। कोई आदमी तभी अपने जीवन का पूरा आनन्द उठा सकता है,जब वह शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहे। उन्होंने आहार निद्रा और ब्रह्मचर्य के संयम की बात कही।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रांतीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि शरीर ही धर्म का श्रेष्ठ साधन है।यदि हम धर्म में विश्वास रखते हैं और स्वयं को धार्मिक कहते हैं,तो अपने शरीर को स्वस्थ रखना हमारा पहला कर्तव्य है।यदि शरीर स्वस्थ नहीं है,तो जीवन भार स्वरूप हो जाता है।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि योग की परम्परा को आत्मसात कर के रोगों से दूर रह कर प्रसन्नता पूर्वक जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

गायिका दीप्ति सपरा,सविता आर्या,उर्मिला आर्या,आशा आर्या, जनक अरोड़ा, रमादेवी नागपाल, बिन्दु मदान, रविन्द्र गुप्ता, कुसुम भण्डारी, ईश्वर देवी आर्या, प्रवीना ठक्कर, प्रतिभा सपरा, सुख वर्षा सरदाना आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर आचार्य महेन्द्र भाई, आनन्द प्रकाश आर्य, डॉ रचना चावला, विजय हंस, अमीरचंद्र रखेजा, रामकुमार सिंह आर्य, अतुल सहगल, दुर्गेश आर्य, डी पी परमार, ललित बजाज, राजश्री यादव, उर्मिला आर्या, महेन्द्र प्रताप नागपाल आदि उपस्थित थे।