अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान जानकी वाटिका कक्षा द्वारा होली मंगल मिलन हर्षोल्लास से सम्पन्न




धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

ग़ाज़ियाबाद। अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान जानकी वाटिका कक्षा

द्वारा होली मंगल मिलन नेहरू नगर मे हर्षोल्लास से सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम का शुभारम्भ योगाचार्य नेतराम जी ने ओ३म् की ध्वनि और गायत्री मंत्र से किया और साधकों को सुक्ष्म अभ्यास के साथ साथ ताड़ासन,भस्रिका, कपालभांति और अनुलोम विलोम  प्राणायाम का अभ्यास कराया और इसके लाभों की चर्चा की। 

कार्यक्रम संयोजिका वीना वोहरा ने सूर्य नमस्कार का अभ्यास कराया और उसके लाभों की चर्चा की उन्होंने स्नेह,प्यार और उमंग के साथ होली का त्यौहार मनाने पर बल दिया और होलिकोत्सव की सभी को हार्दिक बधाई दी और कक्षा में आये हुये सभी साधक साधिकाओं का आभार व्यक्त किया। 

विशेष आमंत्रित सेवा सदन के महामंत्री चौधरी मंगल सिंह ने विषम स्थितियों मे कैसे खुश रहा जा सकता है पर विस्तृत चर्चा की।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् उत्तर प्रदेश के प्रांतीय मंत्री प्रवीण आर्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत शिक्षा के अभाव में हमें वास्तविक तथ्यों का ज्ञान नहीं हो पाता।आइये जानें होली का यथार्थ तिनको की अग्नि में भूने हुए अधपके फली युक्त फसल को होलक(होला) कहते हैं।अर्थात् जिन पर छिलका होता है जैसे हरे चने आदि।ऋतु के अनुसार,दो मुख्य प्रकार की फसलें होती हैं। खरीफ, रवि

रवि की फसल में आने वाले सभी प्रकार के अन्न को होला कहते है।

"वासन्तीय नवसंस्येष्टि होलकोत्सव" वसन्त ऋतु में आई हुई रवि की नवागत फसल को होम हवन मे डालकर फिर श्रद्धापूर्वक ग्रहण करने का नाम होली है। यह पर्व प्राकृतिक है ऐतिहासिक नही है और बाद में होला से ही होली बना है। प्रहलाद-होलिका वाला दृष्टान्त आलंकारिक है। इस दृष्टांत( को इस प्रकार समझा जा सकता है। जो हरा चना होता है उस पर जो छिलका होता है उसे होलीका कहते हैं।वह तो जल जाता है परंतु अंदर में जो प्रह्लाद (अन्न,चना) होता है वह नहीं जलता। बस इसी से होलीका और प्रहलाद वाली कहानी को इतिहास के साथ जोड़कर बताया गया है। छिलका जल जाता है किंतु चना (अन्न) सुरक्षित रहता है।होली एक प्राकृतिक पर्व है, भौगोलिक पर्व है। होली मनाने का सही विधान, वसन्त ऋतु के नये अन्न को यज्ञ (हवन) में आहुति देकर ग्रहण करना है। क्योंकि भारतीय संस्कृति दान देकर, बाँट कर खाने में विश्वास करती है। उन्होंने एक सुंदर गीत "जो होली सो हो-ली भुला दो उसे, आज मिलने मिलाने का त्यौहार है, त्याग दो छल कपट की भावना,प्रेम गंगा बहाने का त्यौहार है।"सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया।

इस अवसर पर समाज सेवी जुगल किशोर गोयल जी का पीतवस्त्र ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया उन्होंने  होली के चुट्कलो से सबको भाव विभोर कर दिया।

गायिका श्रीमती सुमन बंसल ने होली का एक सुंदर गीत गा कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया। 

समाज राम प्रकाश गुप्ता जी ने होली पर्व की सबको बधाई दी।

इस अवसर पर मुख्य रूप से सतीश गर्ग, अरविंद गर्ग, विभा भारद्वाज, इशिका बवेजा, वीना गुप्ता, बबिता वर्मा, बिमला, ज्योति गोयल, रितु सिंघल, मीनू गोयल आदि उपस्थित रहे।


शांतिपाठ के साथ सभा संपन्न हुई। प्रसाद ग्रहण कर साधक आपस में बधाइयाँ देते हुए घरों को लोटे।