"शांतिप्रकरण" शान्ति के वरदान व गोविंदबल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर किया नमन



धनसिंह—समीक्षा न्यूज

मन,बुद्धि,प्राण और आत्मा की शांति के लिए शान्तिकरण के मंत्र आवश्यक-आचार्य चन्द्रशेखर शर्मा

प.पन्त ने हिन्दी को राजभाषा के रूप में स्थापित किया-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में वेदों के "शांतिप्रकरण से शान्ति के वरदान" व 60 वीं प. गोविंद बल्लभ पंत की पुण्यतिथि पर गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन किया गया।यह परिषद का कोरोना काल में 184 वां वेबिनार था।

वैदिक विद्वान आचार्य चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि शान्तिकरण

 के मंत्रों में शान्ति के अनुपम एवं दिव्य वरदान हैं।हम वेद के मंत्रों का पाठ करते हुए शान्ति के महासागर में मानसिक स्नान करके परमशान्ति प्राप्त कर सकते हैं आचार्य जी ने कहा कि परमात्मा,जीवात्मा,प्राकृतिक पदार्थ,सूर्य,चन्द्र,विद्युत,पृथ्वी, समुद्र,नदियाँ,विद्वान,विद्या, वेदवाणी,दिन,रात्रि,प्रभात आदि सर्वत्र शान्ति का महास्त्रोत विद्यमान है।उन्होंने कहा कि शान्ति पाठ में  महा शान्ति,महा प्रेमानन्द और महानन्द रस का अजस स्त्रोत बह रहा है।शान्ति पाठ में 11 शान्ति का उपदेश है।शंन: सुकृतां सुकृतानि सन्तु, सुन्दर कार्य करने वालों के श्रेष्ठ कार्य मुझे शान्ति प्रदान करें। "शंनो देवानां सुनवानि सन्तु" विद्वानों के प्रशंसनीय वचन मुझे शान्ति प्रदान करें।मेरी कर्मेन्द्रियों, ज्ञानेन्द्रियों,मन,बुद्धि,प्राण और आत्मा में शान्ति प्राप्त है।आचार्य की ओजस्वी एवं सरस वाणी में शान्ति का संदेश सुनकर सभी श्रोतागण भाव विभोर हो रहे थे।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने प्रसिद्ध स्वतन्त्रता सेनानी और वरिष्ठ भारतीय राजनेता,उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमन्त्री और भारत के चौथे गृहमंत्री पंडित गोविन्द बल्लभ पन्त की 60 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने काकोरी कांड के नायकों का केस लड़ने में सहयोग किया।गृहमंत्री के रूप में उनका मुख्य योगदान भारत को भाषा के अनुसार राज्यों में विभक्त करना रहा तथा हिन्दी को भारत की राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करना रहा। उनके विचार समय समय पर लोगो का मार्ग प्रशस्त करते थे। वह राजनीति में रहकर भी अजातशत्रु थे,उनके राष्ट्रवादी विचार व हिंदी प्रेम प्रेरणा का कार्य करते थे।

मुख्य अतिथि आर्य नेता विनोद कालरा ने कहा कि  शांति पाठ पढ़ते समय हमारे मन के अंदर जीवन के व्यवहारों को इस प्रकार से करने का संकल्प आना चाहिए जिससे हम अशांति से बच सके और शांति को प्राप्त कर सकें। इसके लिए हमारे हृदय एवं मस्तिष्क के विचार भी इसी प्रकार के होने चाहिए।शांति पाठ का मुख्य उद्देश्य जगत के पदार्थों को मालिक की दृष्टि से नहीं अपितु "इदं न मम" अर्थात यह सब मेरा नहीं हैं की दृष्टि से भोगने की प्रेरणा देना हैं जिससे यह सभी पदार्थ सुख व शांति देने वाले हों।

कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ.(कर्नल) विपिन खेड़ा ने कहा कि शांति पाठ के मंत्र में ईश्वर से जल, पृथ्वी,औषधि,वनस्पति आदि को शांति प्रदान करने के लिए प्रार्थना की गई हैं।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कार्यक्रम के सफल आयोजन पर सभी को शुभकामनाएं दी और कहा कि समय समय पर इस प्रकार के आयोजन होते रहने चाहिए। 

गायिका प्रवीना ठक्कर,सुदेश डोगरा,कुसुम भण्डारी,मधु खेड़ा, रविन्द्र गुप्ता,डॉ अनुराधा आनन्द आदि ने गीतों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर आचार्य महेन्द्र भाई,देवेन्द्र भगत,सौरभ गुप्ता, प्रेम सचदेवा,आनन्द प्रकाश आर्य, डॉ रचना चावला,विजय हंस आदि उपस्थित थे।