"आर्य समाज और राष्ट्र निर्माण" पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न



धनसिंह—समीक्षा न्यूज 

आर्य समाज राष्ट्रीयता की भावना का प्रसारक है-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य


युवा ही है राष्ट्र निर्माण की पहली सीढ़ी-आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी (बिजनौर)


गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "आर्य समाज और राष्ट्र निर्माण" विषय पर आर्य गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन ज़ूम पर किया गया।यह परिषद का कोरोना काल में 194वां वेबिनार था।


वैदिक विद्वान आचार्य विष्णुमित्र वेदार्थी (बिजनौर) ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का रास्ता युवा पीढ़ी से होकर ही निकलता है, बिना युवाओं के विकास से राष्ट्र निर्माण की कल्पना नहीं कि जा सकती। आर्य समाज युवा निर्माण कार्य से युवाओं को राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत करता है जिससे युवा राष्ट्र की प्रगति और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे ईमानदारी से प्रयासों के साथ तेजी से बदलाव और विकास ला सकते हैं। इसलिए,यदि आर्य समाज युवाओं की शक्ति का उपयोग बुद्धिमानी और आशा से करता है, तो यह निश्चित रूप से राष्ट्रीय विकास का कारण बन सकता है।हमें युवा शक्ति में राष्ट्रीयता की भावना के प्रचार प्रसार का कार्य करना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आर्य समाज राष्ट्र का सजक प्रहरी है, महर्षि दयानंद जी ने कहा था कि कोई कितना ही करे पर स्वदेशी राज्य सर्वोत्तम है। आज की समय की मांग है कि राष्ट्र निर्माण में हम सभी को मिलकर योगदान देना चाहिए क्योंकि हम सभी के लिए हमारा राष्ट्र सबसे बढ़कर है। आज हम देखें तो हमारा भारत देश तेजी से आगे बढ़ रहा है यह देश इसी तरह से और भी आगे बढ़ता रहे इसमें हम सभी को मिलकर योगदान देना चाहिए। देश की संप्रभुता के साथ साथ संस्कृति की रक्षा भी आवश्यक है और आर्य समाज के पास वो विचारधारा है जिससे ये सब सम्भव हो सकता है।

कार्यक्रम अध्यक्ष सुशील बंसल (मंत्री,आर्य समाज बुढ़ाना गेट मेरठ) ने कहा कि किसी राष्ट्र का साहित्य उन्नत व समृद्धशाली है तो वह राष्ट्र भी उन्नत तथा समृद्धशाली होगा और यदि वहां साहित्य का अभाव है, तो उस राष्ट्र का बने रहना कठिन होगा। आर्य समाज का श्रेष्ठ साहित्य, आर्ष ग्रंथ आदि राष्ट्र निर्माण में सहायक है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि आर्य समाज ने भारत में राष्ट्रवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है। स्वामी दयानन्द सरस्वती आधुनिक भारत के धार्मिक नेताओं में प्रथम महापुरूष थे जिन्होने 'स्वराज्य' शब्द का प्रयोग किया। आर्य समाज ने हिन्दू धर्म में एक नयी चेतना का आरंभ किया था।

गायिका संतोष आर्या (राजपुरा, पंजाब), सुलोचना देवी, आशा आर्या, रविन्द्र गुप्ता,कुसुम भण्डारी, ईश्वर देवी आर्या, प्रवीना ठक्कर, उर्मिला आर्य, प्रतिभा कटारिया आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आचार्य महेन्द्र भाई, सौरभ गुप्ता, आनन्द प्रकाश आर्य, डॉ रचना चावला, विजय हंस, रामकुमार सिंह आर्य, अतुल सहगल, ललित बजाज, अलका गुप्ता, राजेश सेठी, अमरनाथ बत्रा आदि उपस्थित थे।