वैदिक संध्या पर गोष्ठी व रामनाथ सहगल को दी श्रद्धांजलि


धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के लिए संध्या पहली सीढ़ी-आचार्य विजयभूषण आर्य

आर्य समाज के लिए समर्पित रहा रामनाथ सहगल का जीवन-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "वैदिक संध्या" व आर्य नेता रामनाथ सहगल के 98 वें जन्मदिन पर आर्य गोष्ठी का आयोजन ऑनलाइन जूम पर किया गया। यह परिषद का कोरोना काल में 187 वां वेबिनार था। उल्लेखनीय है कि रामनाथ सहगल का जन्म 13 मार्च 1923 को सरगोधा,पंजाब(अब पाकिस्तान) में हुआ था।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आर्य नेता रामनाथ सहगल का जीवन आर्य समाज के प्रति सदैव समर्पित रहा, आपने युवाओं को आर्य समाज और महर्षि दयानंद की विचारधारा से जोड़ने के लिए सराहनीय कार्य किया।उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती की जन्मभूमि टंकारा को सवारने व विश्व प्रसिद्ध करने का श्रेय सहगल जी को ही जाता है। अजमेर में 1983 में आयोजित महर्षि दयानंद निर्वाण शताब्दी समारोह के संयोजक का कार्य कुशलता से निभाया।आप डी ए वी मैनेजिंग कमैटी के उपप्रधान व आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा के भी वर्षा सचिव रहे।ऐसे हनुमान कार्यकर्ता को आर्य समाज की ओर से उनकी सेवाओं को स्मरण करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।आज की युवा शक्ति के लिए सहगल जी का जीवन प्रेरणा देने का कार्य करता रहेगा।

वैदिक विद्वान आचार्य विजय भूषण आर्य ने "वैदिक संध्या" क्यों और कैसे विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वैदिक संध्या परमात्मा के निकट जाने का पहला साधन है।मनुष्य के  शरीर में  इन्द्रिय,मन,बुद्धि,चित और अहंकार स्थित हैं।वैदिक संध्या में आचमन मंत्र से शरीर, इन्द्रिय स्पर्श और मार्जन मंत्र से इन्द्रियाँ, प्राणायाम मंत्र से मन,अघमर्षण मंत्र से बुद्धि, मनसा-परिक्रमा मंत्र से चित और उपस्थान मंत्र से अहंकार को सुस्थिति संपादन व शुद्व किया जाता है। फिर गायत्री मंत्र द्वारा ईश्वर की स्तुति-प्रार्थना और उपासना की जाती हैं।अंत में ईश्वर को नमस्कार किया जाता हैं।यह पूर्णत वैज्ञानिक विधि हैं जिससे व्यक्ति धार्मिक और सदाचारी बनता हैं,धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष को सिद्ध करता हैं।

आर्य नेता अरुण आर्य (मंत्री, आर्य प्रतिनिधि सभा जम्मू कश्मीर) ने कहा कि महर्षि दयानंद ने वैदिक संध्या प्रात: और सांय दो बार करने का प्रावधान बताया  है।दो बार क्योंकि प्रात: की गई संध्या से प्रात: से सांय तक परमेश्वर का स्मरण करते हुए उत्तम आचरण करने की प्रेरणा मिलती हैं और सांय करी गई संध्या से सांय से प्रात: तक परमेश्वर का स्मरण करते हुए उत्तम आचरण करने की प्रेरणा मिलती हैं।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद दिल्ली प्रान्त के संचालक रामकुमार सिंह आर्य ने कहा कि ईश्वर की स्तुति करने का उद्देश्य ईश्वर के समान न्यायकारी,दयालु,सत्यवादी,श्रेष्ठ कर्म करने वाला बनना हैं।वैदिक संध्या का शुद्ध उच्चारण हम सभी को आना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि वैदिक संध्या पूर्णत: वैज्ञानिक और प्राचीन काल से चली आ रही हैं।यह ऋषि -मुनियों के अनुभव पर आधारित हैं।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि वैदिक संध्या में सर्वशक्तिमान परमपिता परमेश्वर की उपासना बताया गया है।

गायिका प्रवीना ठक्कर(मुंबई), बिन्दु मदान,रविन्द्र गुप्ता,कुसुम भण्डारी,ईश्वर देवी आर्या, सुलोचना देवी,किरण सहगल, प्रेमा हंस (ऑस्ट्रेलिया),विजय लक्ष्मी,आशा आर्या,सुषमा बजाज आदि ने अपने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस अवसर पर आचार्य महेन्द्र भाई,आनन्द प्रकाश आर्य,डॉ रचना चावला,दुर्गेश आर्य,अरुण आर्य,महेन्द्र प्रताप नागपाल, विजय हंस, सुषमा गोग्लानी, उर्मिला आर्या,इन्दु मेहता आदि उपस्थित थे।