208 वा आर्य वेबिनार सोल्लास संम्पन्न

 




धनसिंह-समीक्षा न्यूज 

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में कोरोना काल में 208 वां वेबिनार ऑनलाइन जूम पर आयोजित किया गया। विषय था "सत्ता का तंत्र और संभावनाएं",साथ ही राष्ट्रीय कवि रामधारी सिंह दिनकर की 47 वीं पुण्यतिथि पर उन्हें स्मरण कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आजादी से पहले रामधारी सिंह दिनकर विद्रोही कवि और आजादी के बाद राष्ट्रवादी कवि कहलाये। वह देश भक्ति, ओज, वीर रस, विद्रोह, आक्रोश व क्रान्ति के कवि रहे। आपातकाल में उनकी रचना "सिंहासन खाली करो कि जनता आती है" ने तहलका मचा दिया। दिनकर कवि,लेखक,निबंधकार, विद्वान रहे और आपकी कविताओं ने स्वतंत्रता संग्राम में अग्नि का काम किया। आपका निधन 24 अप्रैल 1974 को चेनई में हुआ था।पद्मभूषण,साहित्य अकादमी सहित अनेको पुरस्कारों से सम्मानित हुए ऐसे स्वाभिमानी कवि का जीवन आज सबके लिए आदर्श है। मुख्य वक्ता डॉ. मनोज तंवर (गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार) ने कहा कि सत्ता और तंत्र दोनों भिन्न भिन्न स्थितियां हैं वहीं दोनों को साथ रखे बिना सामाजिक संगठन भी सम्भव नही।सत्ता जहां मुख्यतया शक्ति को बांधने का प्रयास है वहीं तंत्र वो सिस्टम है जो शक्ति के बिखरे बुरे अणुओं को एक साथ रखने का प्रयास करता है!वास्तव में सत्ता का मूल शक्ति के केन्द्रीयकरण और विकेन्द्रीयकरण में निहित है!समाज पूर्णतया एक संश्लेषणात्मक प्रक्रिया है जिसका संश्लेषण स्वेच्छा से तब होता है जब प्रत्येक व्यक्ति एक सक्रिय इकाई हो जो कि सम्भव नही है और एक तंत्र के रूप में संश्लेषण तब होता है जब व्यक्तियों का गुट एक वर्ग अथवा कबिले का रुप लेता है। यहीं से राजनैतिक तंत्र की शुरुआत होती है जो समय पर राजतंत्र और लोकतंत्र जैसे तंत्रों के रुप में विकसित होता है। भविष्य में किसी अन्य तंत्र की संभावना तो नही है अपितु लोकतंत्र का ही एक ऐसा विकसित रूप प्रकट हो सकता है जिसमे समाज की सबसे छोटी इकाई एक मनुष्य भी दिन प्रतिदिन के निर्णयों में प्रत्यक्ष भागीदार होगा तथा जिसमे टेक्नोलॉजी मुख्य भूमिका निभाएगी। अध्यक्षता करते हुए प्रो.विश्राम वाचस्पति( प्रपौत्र स्वामी श्रद्धानंद  व पूर्व फीचर संपादक, हिन्दुस्तान) ने रामधारी सिंह दिनकर को नमन करते हुए क्रांतिकारी कवि बताया, उन्होंने कहा कि कोरोना-काल में जहां हर तरफ निराशा और दुख का माहौल है,वहां अनिल आर्य द्वारा लगातार संचालित किए जा रहे ऐसे आयोजन इम्युनिटी बूस्टर का काम कर रहे हैं। वहीं डॉ. मनोज तंवर  द्वारा एक गंभीर और सामयिक विषय पर चर्चा से मानसिक खुराक हासिल हुई।  केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री प्रवीण आर्य ने आज के कवियों को दिनकर जी से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कुशल संचालन किया । गायिका सुदेश आर्या, पुष्पा चुघ, उर्मिला आर्य, जनक अरोड़ा, ईश्वरदेवी, सुशांता आर्या, चंद्र कांता आर्या, नरेंद्र आर्य सुमन, नरेश खन्ना, प्रवीना ठक्कर आदि ने मधुर गीत सुनाये।