राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगोर की 160 वीं जयंती पर ऑनलाइन किया नमन

 




धनसिंह—समीक्षा न्यूज 

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रवींद्रनाथ टैगोर को उनकी 160 वीं जयंती पर ऑनलाइन नमन कर याद किया गया।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि महर्षि दयानन्द ने वेद प्रचार की अपनी यात्राओं के दोरान वह राष्ट्रकवि श्री रवीन्द्रनाथ टैगोर के पिता देवेन्द्रनाथ टैगोर व उनके परिवार से उनके निवास पर मिले थे। आपका जन्म कोलकत्ता में 7 मई सन् 1861 को हुआ तथा मृत्यु भी कोलकत्ता में ही 7 अगस्त सन् 1941 को हुई। आप अपनी विश्व प्रसिद्ध रचना ‘‘गीतांजलि” के लिए सन् 1913 में सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान नोबेल पुरुस्कार से सम्मानित थे। टैगोर ने देश व समाज में जो उच्च स्थान प्राप्त किया, उसके कारण उनके ऋषि दयानन्द विषयक विचारों व स्मृतियों का महत्व निर्विवाद है। रवीन्द्रनाथ टैगोर पहले भारतीय थे, जिन्हें इस सम्मान से अलंकृत किया गया। गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर द्वारा सन् 1937 में लाहौर के डी.ए.वी. कालेज के सभागार में ऋषि दयानन्द को भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी थी। सौरभ गुप्ता ने कहा रविन्द्र नाथ टैगोर ने गोरा, राजरानी, घरे-बाहिरे, विनोदिनी जैसे प्रसिद्ध उपन्यास भी लिखे। चित्रा उनका प्रसिद्ध गीतनाट्य है। उनकी कहानी काबुलीवाला पर इसी नाम से एक फिल्म भी बनी, जिसे देखकर आज भी दर्शकों की आँखें भीग जाती हैं। प्रांतीय अध्यक्ष आनंद प्रकाश आर्य ने कहा कि रवीन्द्रनाथ शिक्षा को देश के विकास का एक प्रमुख साधन मानते थे। इस हेतु उन्होंने 1901 में बोलपुर में ‘शान्ति निकेतन’ की नींव रखी। यहाँ प्राचीन भारतीय परम्पराओं के साथ ही पश्चिमी शिक्षा का तालमेल किया गया है। नोबेल पुरस्कार मिलने के बाद 1921 में उन्होंने शान्ति निकेतन में ही ‘विश्व भारती विश्वविद्यालय’ की स्थापना की। इसमें विश्व भर के छात्र पढ़ने आते थे। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि भारत का वर्तमान राष्ट्रगान ‘जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता..’ उनका ही रचा हुआ है। यद्यपि कुछ लोगों का कहना है कि यह जार्ज पंचम की स्तुति में रचा गया था।