"दैनिक यज्ञ की उपयोगिता" पर गोष्ठी सम्पन्न





धनसिंह—समीक्षा न्यूज 

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् द्वारा आयोजित 218 वें वेबिनार में सम्बोधित करते हुए आचार्य विजय भूषण आर्य द्वारा दैनिक यज्ञविधि एवं शुद्ध मंत्रोच्चारण पर बहुत ही सरल सुबोध भाषा में सविस्तार ज़हां यज्ञ विधि की एक रुपता की आवश्यकता का महत्व बताया वहां मंत्रों में सामान्य जनों द्वारा अधिकांश की जाने वाली अशुद्धियों को दूर करने हेतु व्याकरण के नियमानुसार उन्हें शुद्ध ढंग से उच्चारण करने का सुझाव दिया। आचार्य श्री ने आह्वान किया कि कोरोना महामारी को दूर करने हेतु विशेष जड़ी बूटियों द्वारा यज्ञ करना हम सभी के लिए रामबाण ओषधि है। जैसे हम प्रतिदिन भोजन करते हैं वैसे ही यज्ञ भी प्रतिदिन करना चाहिए। आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानंद सरस्वती के अनुसार प्रत्येक मनुष्य को चाहे वह हिंदू हो,मुसलमान हो, सिख, इसाई कोई भी क्यों ना हो- प्रतिदिन यज्ञ करना चाहिए और कम से कम 16 आहुतियां अवश्य प्रदान करनी चाहिए जिससे वातावरण को शुद्ध किया जा सके। उन्होंने ने बताया कि वे प्रतिदिन दोनों समय यज्ञ विशेष जड़ी बूटियों से करते हैं और लगभग 200 आहुतियों द्वारा दूषित वातावरण को शुद्ध कर अपने कर्तव्य का पालन कर रहे हैं। आचार्य जी ने दैनिक यज्ञ की विधियों को जहां इसके अर्थ को स्पष्ट किया वहां सभी मंत्रों का शुद्ध उच्चारण भी प्रस्तुत किया अंत में श्रोताओं की शंकाओं का भी सुंदर ढंग से समाधान किया। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म है जो बिना भेदभाव के सबका कल्याण कारी है व सुख देने वाला है। आर्य नेता विजय कपूर ने अध्यक्षता की व नरेन्द्र आर्य सुमन मुख्य अतिथि रहे।केंद्रीय आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के महामंत्री प्रवीण आर्य ने भी यज्ञ की महत्ता पर प्रकाश डाला।

गायिका पुष्पा चुघ, दीप्ति सपरा, मृदुला अग्रवाल, संगीता आर्या, नरेश खन्ना, आशा आर्या, रवीन्द्र गुप्ता आदि ने भजन सुनाये। डॉ सुषमा आर्या, डॉ रचना चावला, आनन्द प्रकाश आर्य, उषा आहूजा, कमलेश हसीजा आदि उपस्थित थे।