"आनंदमय जीवन कैसे बितायें" आर्य गोष्टी सम्पन्न





धनसिंह—समीक्षा न्यूज

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "आनंदमय जीवन कैसे बितायें" विषय पर ऑनलाइन आर्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल में 220 वां वेबिनार था। वैदिक विदुषी दर्शनाचार्या विमलेश बंसल  ने अपनी ओजस्वी,ज्ञानवर्धक वाणी में कहा कि संसार एक नुकीले, बर्फीले पत्थरों वाली नदी है जिसे यजुर्वेद में (अश्मन्वती) शब्द से प्रकट किया है।ऐसी नदी को वही लोग पार कर पाते हैं जो होशपूर्वक और जोश पूर्वक धैर्य तथा कम भार वाले होकर चलते हैं। सुख-दुख, धूप-छांव,मान-अपमान के बर्फीले नुकीले पत्थर, इस नदी में भरे पड़े हुए हैं सुख का पानी कम है, बहाव तीव्र है, सहयोगी, उपयोगी व उद्योगी तथा परस्पर मित्र बनकर, प्रसन्नता पूर्वक एक दूजे का हाथ पकड़कर चलने से यह यात्रा दुर्गम से सुगम हो जाती है। ईश्वर की कृपा व विद्या व विवेक के सहारे से आनन्दित हो इस संसार को कुशलता से जीने में सहायता मिलती है। संसार की नश्वरता और आत्मा की अमरता को जान हँस हँस,हंस बन कर व्यक्ति विचलित व दुखी हुए बगैर स्थितप्रज्ञ हो आनन्द के साथ इस नदी को पार कर जाता है। तो आइए- अविद्या के कारण रोग, कष्ट,क्लेश, कोरोना जैसी महामारी,बीमारी,सुख-दुख, अनुकूल स्थिति-विपरीत परिस्थिति यह तो सब आती रहेंगी, जाती रहेंगी इनसे घबराना नहीं, न भय खाना, इन पर विजय प्राप्त करते हुए सबको मिल जुलकर आगे बढ़ना है यात्रा लंबी है निराशा से और लंबी प्रतीत होती है। अतः आशावादी हो सकारात्मक सोच के साथ प्रसन्नतापूर्वक, सृजनात्मक, रचनात्मक, सेवा कार्यों से जुड़ते हुए ईश्वरीय कार्यों में व्यस्त मस्त हो यह संसार रुपी नदी पार करें। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सकारात्मक सोच व्यक्ति के आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करती है।जिससे व्यक्ति स्वयं ही प्रसन्नता का अनुभव करता है। परिषद के उत्तर प्रदेश प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि योग प्रसन्नता का व सुख देने का साधन है जीवन मे इसे आत्मसात करना चाहिए। मुख्य अतिथि डॉ कल्पना रस्तोगी व अध्यक्ष समाजसेवी वीना वोहरा ने भी उत्साह पूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला।

गायिका पुष्पा चुघ, दीप्ति सपरा, नरेन्द्र आर्य सुमन, वीरेन्द्र आहूजा, राजकुमार भंड़ारी, संध्या पांडेय, राजश्री यादव, प्रवीना ठक्कर, रविन्द्र गुप्ता आदि ने गीत प्रस्तुत किये।

आचार्य महेन्द्र भाई, आनन्द प्रकाश आर्य, सौरभ गुप्ता, कुसुम आर्या, आशा आर्या, कुसुम भंडारी, संजय सपरा,रेखा गौतम आदि उपस्थित थे।