साहेब कबीर जी ने एकता का पाठा पढ़ाया - सिकंदर यादव



धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

गाजियाबाद। सद्गुरु सेवा समिति एवं युवा विकास प्रयास समिति गाजियाबाद  के संस्थापक श्री सिकंदर यादव जी द्वारा किरोना काल में सभी नियमों का पालन करते हुए उनके निवास स्थान थर्ड बी 52 नेहरू नगर गाजियाबाद में साहेब कबीर जी का 624 वां प्रकट दिवस दसवे विशाल भंडारे का आयोजन कर मनाया गया, जिसमें हजारों साहेब कबीर अनुयायियों ने प्रसाद ग्रहण किया

वरिष्ठ समाजसेवी एवं सद्गुरु सेवा समिति और युवा विकास प्रयास समिति गाजियाबाद के संस्थापक श्री सिकंदर यादव जी ने बताया कि समाज सुधार के क्षेत्र में साहेब कबीर दास जी का नाम सर्वोपरी है। संत कबीरदास जी की प्रसिध्द रचनाओं में बीजक, सखी ग्रंथ, कबीर ग्रंथावली और अनुराग सागर शामिल है। कबीरदास जी की रचनाएं इतनी ज्यादा प्रभावशाली हैं कि इनका गुणगान भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी किया जाता है। इनकी रचनाओं से आकर्षित होकर विदेशी लोग भी इसमें रम गए हैं। साहेब कबीरदास जी के कार्यों की पहचान उनके दो पंक्तियों के दोहे से है, जिन्हें ‘‘कबीर के दोहे’’ के नाम से जाना जाता है।

श्री यादव ने आगे कहते हुए बताया कि संत कबीर के दोहे हमें प्रेरणा देते हैं और साथ ही अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने का काम करते हैं। आज भी इनकी वाणी अमृत के समान है, जो व्यक्ति को नया जीवन देने का काम कर रही है। साहेब कबीरदास जी की हर रचनाओं का प्रयास यही था की लोग उनकी रचनाओं से अपने अंदर प्रेम, सद्भाव और एकता कायम करें।

 श्री सिकंदर यादव कहते है कि कबीर जी ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। उन्होनें अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों को दूर करने में लगा दिया। दोहे के रूप में उनकी रचनाएं आज भी गायी गुनगुनाई जाती हैं। इन्होनें अपने पूरे जीवन काल में पाखंड, अंधविश्वास और व्यक्ति पूजा का विरोध करते हुए अपनी अमृतवाणी से लोगों को एकता का पाठा पढ़ाया। साहेब कबीरदास जी की रचनाओं से प्रेरणा पाकर हिन्दू-मुसिलम धर्म के लोग काफी प्रभावित हुए थे।