"आनंदमय जीवन" पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

प्राकृतिक जीवन शैली से होगा आनंदमय जीवन -डा.मदन मानव

सत्य के पथ पर चलना मनुष्य के लिए हितकर -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में आयोजित 257 वें राष्ट्रीय बेबिनार में मुख्य वक्ता डा.मदन मानव (भिवानी)  ने कहा कि योगमय प्राकृतिक जीवन शैली अपनाने से ही आनंदमय जीवन सम्भव है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति सदा सुख और आनंद में रहना चाहता है लेकिन वह नहीं जानता कि सुख और आनंद कहां से मिल सकता है।आज लगभग हर व्यक्ति आह आह करते हुए कराहते हुए जीने को मजबूर है जबकि वाह वाह करते हुए हमें जीना चाहिए यह वाह वाह हमारे जीवन में आ सकता है प्रकृति के सानिध्य से,परमात्मा के  सानिध्य से,प्रकृति सुखदायक है परमात्मा आनंददायक है।प्राकृतिक जीवन शैली को अपनाते हुए नियमित रूप से योग साधना करते हुए हम स्वयं सुखी और आनंदित रहते हुए दूसरों को सुख और आनंद देने का प्रयास करते हुए मोक्ष की ओर बढ़ सकते हैं यही मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य है इसे हमें यथा संभव अपने जीवन में सम्मिलित करना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि हम आजकल तथाकथित आधुनिक जीवन शैली के चक्कर में फंस कर के हमारे ऋषियों ने जो मार्ग हमें बताया था उससे दूर होकर के समस्याओं से ग्रस्त हो रहे हैं अब  हम सब की आवश्यकता है कि हमारे ऋषियों के बताए हुए मार्ग पर चलें सत्य यही है और सत्य का पथ सर्वोत्तम होता है देर सवेर हर व्यक्ति को ही सत्य समझ में आएगा और उस पर चलना ही मनुष्य के लिए हितकर रहेगा। योगमय प्राकृतिक जीवन जीते हुए हम लोग आनंदमय जीवन जी सकते हैं आकाश वायु अग्नि जल और पृथ्वी पांच तत्वों से यह मनुष्य शरीर और ब्रह्मांड बना है और इन्हीं तत्वों के प्रयोगों से यह सबसे ज्यादा सरल ढंग से,सस्ते ढंग से सर्वोत्तम ढंग से स्वस्थ रह सकता है हमें आवश्यकता है की हम इस सत्य को समझ करके इस पर चलें।हमें जानना चाहिए कि श्वास लेने का सही तरीका क्या है? पानी पीने का सही तरीका क्या है? भोजन करने का तरीका क्या है? उठना बैठना खाना पीना का तरीका क्या है? और यह सब  ऋषियों ने पहले  हमें गुरुकुल परंपराओं में सब सिखाया था लेकिन आधुनिक शिक्षा प्रणाली में यह सब चीजें नहीं हैं और इसी का परिणाम है कि मनुष्य कहने के लिए आर्थिक रूप से समर्थ हो रहा है आधुनिक साधनों से समर्थ हो रहा है लेकिन उसके जीवन से सुख और आनंद गायब हो रहा है साधन बढ़े हैं लेकिन साधनों से सुख नहीं बढ़ा समस्याएं बढ़ी हैं हमें लगता है कि सुख बढ़ रहा है लेकिन इससे बिल्कुल विपरीत है तो आइए हम सत्य को स्वीकार करें और इसे अपने आचरण में लाएं। 

अध्यक्षता करते हुए आशु कवि सत्य प्रकाश भारद्वाज ने कहा कि नई पीढ़ी के लिए योग,यज्ञ और वेद के रुचिकर कार्यक्रम लाने की आवश्यकता है जिससे वह अपनी वैदिक संस्कृति से जुड़े रहें। 

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि योग ही जीवन का आधार है। हम स्वयं से प्रेम करें,स्वयं से जुड़े, पश्चात अष्टांग योग अपनाकर प्रभु से जुडें तभी मोक्ष सम्भव होगा।

गायिका प्रवीना ठक्कर,रवीन्द्र गुप्ता,जनक अरोड़ा,चंद्र कांता अरोड़ा,सुखवर्षा सरदाना,सुमित्रा गुप्ता,सुनीता बनर्जी,बेदराम शर्मा, विजयलक्ष्मी आर्या,मृदुला अग्रवाल,रेखा गौतम आदि ने भजन सुनाये।

प्रमुख रूप से आनंद प्रकाश आर्य,प्रेम सचदेवा,राजेश मेहंदीरत्ता,कैप्टन अशोक गुलाटी, सुदेश डोगरा,ओम सपरा,प्रेमलता गुप्ता,वेद भगत आदि उपस्थित थे।