भाजपा सरकार ने सभी सामने आर्थिक संकट पैदा कर दिया है: रामदुलार यादव


धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामदुलार यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना द्वारा प्रति यूनिट 3 किलो गेंहू, 2 किलो चावल जिसकी कुल बाज़ार मे कीमत 110 /= से अधिक नहीं, वाह-वाही लूटनी तथा अन्न महोत्सव बताना जनता के साथ मजाक से ज्यादा नहीं है| इस अन्न योजना के प्रचार- प्रसार पर सरकारी धन का खर्च तथा इस महोत्सव के आयोजन पर जो धन व्यय हो रहा है वह अप्रत्यक्ष कर के रूप मे जनता द्वारा ही प्रतिदिन भुगतान किया जा रहा है| यह कहना कि नि : शुल्क राशन वितरण किया जा रहा है कहाँ तक उचित है| वैश्विक महामारी कोरोना ने पहले ही छोटे व्यापारियों, निम्न वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग, रेहड़ी, पटरी, खोमचे वाले के सामने आर्थिक संकट पैदा कर दिया है, कमर तोड़ दी है, इनकी आर्थिक स्थिति चौपट हो गई है| पेट्रोल, डीजल के दाम बढ्ने से माल भाड़ा बढ़ जाने के कारण सब्जी, सरसों का तेल तथा सभी खाद्य सामग्री महंगी हो गयी है, रसोई गैस के दाम बढ़ने से महिलाओं के घर का वजट बिगड़ गया है| वर्तमान सरकार जन-कल्याण पर कम प्रचार तन्त्र पर अधिक धन व्यय  कर रही है| देश की आर्थिक स्थिति भयावह हो गई है |

हमने पहले भी सरकार से मांग की है कि जरूरत मंद छोटे व्यापारियों, रेहड़ी, पटरी, खोमचे वालों, छोटे दुकानदारों, मजदूर भाइयों को चिन्हित कर तथा जिन्हें यह नि : शुल्क राशन दिया जा रहा उन सब के खाते मे कम से कम 15000 /=(पन्द्रह हजार रुपये) डाले जाए जब इनके जेब मे रुपया आएगा तो यह बाजार जाएंगे सामान खरीदेंगे तो बाजार मे तरलता आएगी, आज लोहे का दाम तथा हर प्रकार की सामग्री जो कन्स्ट्रकशन मे प्रयोग होती है,आसमान छू रही है, मजदूर तबाह है प्रतिदिन उसे काम नहीं मिल रहा है| उसके सामने घोर संकट और निराशा है, इसका समाधान केवल जरूरत मंद के खाते  मे नकद धन डालने से सम्भव है, हमारी सरकार से मांग कि नि : शुल्क अन्न महोत्सव भी मनाए साथ में बहुत बड़ी संख्या उन लोगों की है जो अन्न योजना से लाभान्वित नहीं होंगे| उनकी ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है, वाह-वाही में ज्यादा धन न खर्च कर सरकार गरीबों को सीधा धन उपलब्ध कराये जिससे जो  दूसरी उनकी आवश्यकता है उसकी पूर्ति हो सके| डीजल, पेट्रोल,रसोई गैस के दाम अबिलम्ब कम कर जनता को राहत दी जा सकती है| सरकार उसकी व्यवस्था तत्काल करे| तभी खाद्यान्न के दाम उचित मूल्य पर जनता को मिल सकता है | जनता का संकट दूर हो सकता है|