अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान द्वारा ऑनलाइन शिक्षक दिवस,योग एवं छटी संम्पन्न


समीक्षा न्यूज संवाददाता  

माता,पिता,गुरु ही सच्चे पथप्रदर्शक - वीना वोहरा

समाज की भावी संरचना की नींव रखते हैं शिक्षक -प्रवीण आर्य

गाज़ियाबाद। अखिल भारतीय ध्यान योग संस्थान के तत्वावधान में शिक्षक दिवस व डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के 133वीं जयंती पर ऑनलाइन गोष्ठी में योग,श्रीकृष्ण छटी पर्व का आयोजन किया गया।

वरिष्ठ योग शिक्षिका वीना वोहरा ने कहा कि माता पिता गुरु हीं सच्चे पथप्रदर्शक हैं सचमुच यदि ये कहा जाए कि माता पिता ईश्वर के समतुल्य है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।माता पिता व गुरु ही जीवन जीने की कला का सही मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।गुरु ज्ञान के दीपक की बाती होता है जो खुद जलकर संसार को ज्ञान से आलोकित करता है।शिक्षक दिवस के अवसर पर हम सभी को संकल्प लेना होगा कि शिक्षकों को पूरा  सम्मान प्रदान करे तभी शिक्षक दिवस मनाना सार्थक सिद्ध होगा,उन्होंने श्रीकृष्ण के छटी पर्व की सभी साधकों को बधाई दी।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय मंत्री एवं योगाचार्य प्रवीण आर्य ने कहा कि शिक्षक समाज की भावी संरचना की नींव रखते हैं।शिक्षक के माध्यम से ही शिक्षित व संस्कारी विद्यार्थी परिवार,समाज और देश के लिए कार्य करना सीखता है।आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द सरस्वती सच्चे शिक्षक व पथप्रदर्शक थे,उनके द्वारा प्रशस्त मार्ग से आज भी लोग पाखंड व अंधविश्वास से दूर रहते है और समाज की कुरीतियों से लोहा लेने का बल रखते हैं।आज भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की 132वीं जयंती है।उन्हे बचपन से ही किताबों से बहुत लगाव था।डॉ॰ राधाकृष्णन समूचे विश्व को एक विद्यालय मानते थे।उनका मानना था कि शिक्षा के द्वारा ही मानव मस्तिष्क का सदुपयोग किया जा सकता है।संस्थान उनकी जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित करता है।

योग शिक्षिका मीनाक्षी अग्रवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया और कहा कि गुरु के बिना ज्ञान सम्भव नहीं इसलिए गुरुओं का सम्मान करने का संकल्प लें।

योग शिक्षिका सुमन बंसल ने कहा कि शिक्षक समाज को एक नयी दिशा देता है।वह चाहे तो समाज में फैली  कुरीतियों, बुराइयों को मिटा कर संस्कार वान पीढ़ी का निर्माण कर  सकता है।

विशेष आमंत्रित श्रीमती दर्शना मेहता ने कहा कि शिक्षक देश के भविष्य और युवाओं के जीवन को बनाने और उसे आकार देने के लिये सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रीमती वंदना अग्रवाल ने कहा कि शिक्षक केवल वही नहीं होता है जो हमे सिर्फ स्कूल,कॉलेजों में पढ़ाये,शिक्षक वो भी है जो हमे जीवन जीने की कला सिखाता है।

गायिका संतोष चावला,सीमा अग्रवाल आदि ने ओजस्वी गीतों से समा बांध दिया।