"राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका" पर गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

शिक्षक शिष्यों के माध्यम से भविष्य का निर्माण करता है -आचार्य हरिओम शास्त्री

अंधेरे में प्रकाश की लो जलाता है शिक्षक-हरिचंद स्नेही

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "राष्ट्र निर्माण में शिक्षक की भूमिका" पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल में 278 वां वेबिनार था।

वैदिक विद्वान आचार्य हरिओम शास्त्री ने कहा कि शिक्षक, अध्यापक और आचार्य ये तीनों ही मनुष्य निर्माण का कार्य करते हैं। एक शिक्षक व आचार्य अपने जीवन काल में असंख्य शिष्यों के निर्माण का पुण्य कार्य करता है। सांख्य दर्शनकार महर्षि कपिल कहते हैं कि उपदेश्योपदेष्टृत्वात् तत्सिद्धि:। इतरथान्ध परम्परा।। अर्थात्-जब तक संसार व समाज में योग्य शिक्षक, अध्यापक और आचार्य होते हैं तब तक उपदेश व शिक्षा की सफलता होती है। परन्तु इनके न रहने पर केवल अंधपरंपराएं‌ ही चलती हैं। स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने सत्यार्थ प्रकाश के द्वितीय समुल्लास में शतपथ ब्राह्मण का उदाहरण देकर कहा है -मातृमान् पितृमान् आचार्यवान् पुरुषो वेद।। अर्थात् श्रेष्ठ माता, श्रेष्ठ पिता और श्रेष्ठ आचार्य की आज्ञा पालन करके मनुष्य ज्ञानी और उत्तम बनता है। प्रत्येक सफल और महान् व्यक्तियों की सफलता के पीछे उनकेे श्रेष्ठतम गुरुओं का महान आध्यात्मिक योगदान होता है। जैसे-श्रीराम जी के निर्माण में गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र जी का, श्री कृष्ण जी के निर्माण में गुरु सन्दीपनी जी का, सम्राट चन्द्रगुप्त मौर्य के निर्माण में गुरु विष्णुगुप्त "चाणक्य"का, स्वामी दयानन्द जी के निर्माण में प्रज्ञाचक्षु गुरु विरजानन्द सरस्वती जी का, स्वामी श्रद्धानंद जी के निर्माण में उनके गुरु स्वामी दयानन्द जी का, स्वामी विवेकानन्द जी के निर्माण में गुरु रामकृष्ण परमहंस जी का।

स्वामी दयानन्द जी महाराज ने प्रत्येक व्यक्ति को दैनिक करने योग्य पंच महायज्ञ में चौथा यज्ञ अतिथि यज्ञ रखा है। यह यज्ञ गुरुओं, शिक्षकों व आचार्यों की सेवा शुश्रुषा प्रतिदिन करने की प्रेरणा देता है। इससे शिक्षकों व आचार्यों के साथ गृहस्थी शिष्यों का भी मान-सम्मान बढता है। अपने जीवन में एक माता पिता मिलकर अपने कुछ बच्चों का पालन-पोषण करते हैं परन्तु एक शिक्षक अपने जीवन में अपने त्याग, तपस्या और शिक्षा तथा आचरण से असंख्य शिष्यों का डडबनिर्माण करता है। अतः अथर्ववेद के वाचस्पति सूक्त में प्रार्थना की गई है- पुनरेहि वाचस्पते देवेन मनसा सह। कि "हे वाणी के स्वामी अध्यापक शिक्षक और उपदेशक,आप दिव्य मन के साथ मेरे घर आओ।"

अध्यक्षता करते हुए आर्य नेता हरिचंद स्नेही ने कहा कि शिक्षक अंधकार में प्रकाश की लो जलाता है । वह राष्ट्र का भविष्य तय निश्चित करता है ।

मुख्य अतिथि शिक्षाविद राज गुलाटी ने शिक्षक की त्याग, तपस्या पर प्रकाश डाला कि वह कच्ची मिट्टी को सवांर कर नया रूप प्रदान करता है ।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने संचालन करते हुए कहा कि आज शिक्षकों को सम्मान प्रदान करने की आवश्यकता है वही राष्ट्र की नीव के पत्थर है ।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि आदर्श गुरु विरजानंद जी ने महर्षि दयानंद का निर्माण किया।

गायिका रजनी गर्ग, रजनी चुघ, किरण सहगल, ईश्वर देवी,प्रवीना ठक्कर, रवीन्द्र गुप्ता, कुसुम भंड़ारी, जनक अरोड़ा, चंद्र कांता आर्या,प्रतिभा कटारिया ने मधुर भजन सुनाये ।