'‘महर्षि दयानन्द और महिला सशक्तीकरण" पर गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

दो परिवारों की दहलीज पर खड़ी नारी दोनों को आलोकित करती है -डॉ. वीना गौतम(पूर्व प्रधानाचार्य, सत्यवती कॉलेज)

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "महर्षि दयानंद और महिला सशक्तिकरण" पर गोष्ठी का आयोजन किया गया ।

यह कोरोना काल में 290 वां वेबिनार था ।

शिक्षाविद,साहित्यकार डॉ.वीणा गौतम ने कहा कि नारी शब्द में  सृष्टि के पॉंच तत्त्वों को लक्षित करते हुए कि दो अक्षर— न और र आकाश और धरती,दो मात्राएँ—आ और ई जल और अग्नि के  बीच अन्त:सलिला के रूप में प्रेम,करूणा,श्रद्धा प्रवाहित हैं। नारी का एक और भी अर्थ बताया कि नारी दो परिवारों की दहलीज़ पर खड़ी नारी दोनों परिवारों को आलोकित- प्रकाशित  करती है। ऐसी नारी की दुर्दशा देख कर महर्षि दयानंद जी का ह्रदय द्रवित हो उठा।नारी-नारायणी बाल- विवाह,अनमेल विवाह बहुविवाह से ही घिरी हुई नहीं थी बल्कि बढ़ती विधवाओं की संख्या ने भी नारी का गौरव क्षीण कर दिया था। ऐसे में महर्षि के आगमन ने नारी को नारायणी का स्थान दिलाने के लिए अपना शंख बजाया कि बालिकाएँ सप्तपदी न लें सकें,विधवाओं का पुनर्विवाह हो,सती प्रथा का उन्मूलन हो और बहुविवाह पर रोक लगे। उन्होंने शिक्षा को अनिवार्य बताया,कन्या गुरूकुल की स्थापना हो। वेदों के अध्ययन और उन्हें यज्ञोपवीत धारण करने पर बल दिया। आज ‘नारी तू नारायणी ‘ जिस प्रतिष्ठा को प्राप्त किए हैं उसका सारा श्रेय महर्षि को देते हुए उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित की। उन्होंने कहा कि दयानंद जी के ही कारण आज मानस की चौपाइयों पर खोज करने पर पता चला है कि ‘ढोर गंवार शूद्र पशु और नारी ‘ प्रक्षिप्त है जबकि सही यह है - ढोल ग्वार क्षुब्ध पशुरारी ‘ है।नारी शक्ति का प्रतीक थी लेकिन महर्षि दयानन्द के कारण वह शक्ति का प्रतीक पुन:बन रही है जिसका उदाहरण स्नेहा दूबे का संक्षिप्त-सारगर्भित भाषण क्वाड की बैठक में देखने को मिल रहा है।नारी की ऊर्जा और शक्ति की नई परिभाषा महर्षि दयानन्द के कारण ही सम्भव हो पाई है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आर्य समाज के माध्यम से नारी शिक्षा के लिए अनेकों गुरुकुल,विद्यालय, महाविद्यालय चल रहे हैं।महर्षि दयानंद ने नारी की शिक्षा,पठन पाठन पर बल दिया ।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि आज समाज मे नारी पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं इसका श्रेय महर्षि दयानंद को जाता है ।

गायक नरेन्द्र आर्य सुमन,रविन्द्र गुप्ता,प्रवीना ठक्कर,प्रवीन आर्या, रजनी चुघ,रचना वर्मा,रजनी गर्ग, कुसुम भंड़ारी,राज चावला,जनक अरोड़ा,रेखा गौतम आदि ने गीत सुनाये।आर्य नेता ओम सपरा के जन्मदिन पर रीता जयहिंद, आस्था आर्या,महेन्द्र भाई,राज कुमार भंडारी आदि ने बधाई दी ।