बच्चों की दीर्घायु का व्रत पर्व अहोई अष्टमी योग साधिकाओं ने आॅनलाइन मनाया


धनसिंह—समीक्षा न्यूज   

गाजियाबाद: योग गुरु अर्चना शर्मा द्वारा नित्य गूगल मीट पर संचालित निशुल्क आनलाइन योग कक्षा में अहोई अष्टमी व्रत पर्व   दिनांक 28 अक्टूबर अपराह्न तीन बजे से साढ़े चार बजे तक लगभग डेढ़ घंटे चले आॅनलाइन  के कार्यक्रम में  योग साधिकाओं ने बडे उत्साह के साथ भाग लिया। जिसमें अहोई अष्टमी के विषय में चर्चा की गई।  संचालन अर्चना शर्मा ने किया। कार्यक्रम में लगभग सोलह महिलाओं ने बडे उत्साह के साथ भाग लिया ।उपस्थित महिलाओं ने  भजन, कविता, चुटकुले एवं गीत सुनाये। 

नीलम अग्रवाल ने भजन-"तोहरे हवाले किया मैंने गोरी मां तू रखना इनका ख्याल" ,नर्वदा गर्ग-"जिस दिन भी बजरंग बाला अपना घर बनाऊंगीं ईंट-ईंट पर तेरा नाम लिखवाऊंगीं।" सुमन गर्ग-"एक बार माँ आ जाओ फिर आके चली चली जाना, यशोदा अग्रवाल-"तू कितनी अच्छी है कितनी प्यारी है हे माँ।" मधु त्यागी-"बचपन में अम्मा की गोदी का एक सहारा था।" मंजू गोयल- " बच्चे का जन्म मां के गर्भ और पिता की आत्मा से होता है, इसलिए  बेटा आत्मज कहलाता है।" मंजू गुप्ता-"आओ बसायें मन मन्दिर में झांकी सीताराम की" विनय गर्ग-" - राष्ट्र हित का गला घोटकर छेद ना करना थाली में मिट्टी वाले दिये जलाना अबकी बार दिवाली में।" सरिता वर्मा-"तुझे सूरज कहूं या चंदा तुझे दीप कहूं या तारा।" पूनम गर्ग -    " देवों के सरताज गजानन आ जाना।"सरोज कुमारी-" सास के लिए कविता-वो भी तो एक मां है सौंप देती है सब अपना",

" प्रभा अग्रवाल ने चुटकुला। कंचन शर्मा ने कविता "ममतामयी मां के आंचल में हर बच्चा"और अर्चना शर्मा ने गाना "बच्चे मन के सच्चे" सुनाया। इनके अतिरिक्त कार्यक्रम में सुनीला मल्होत्रा और रीता वर्मा ने भी भाग लिया। 

कार्यक्रम के समापन से पूर्व अहोई अष्टमी और प्रथम पूज्य गणपति की कहानी सुनायी गयी।