विजय दशमी शौर्य पर्व पर गोष्ठी सम्पन्न


धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

शास्त्र के साथ शस्त्र के वरण करने वाले बने -विमलेश बंसल दर्शनाचार्य

चित्र नहीं अपितु चरित्र की पूजा करें-राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "विजय दशमी शौर्य पर्व" पर ऑनलाइन गोष्ठी सम्पन्न हुई।यह कोरोना काल में 298 वां वेबिनार था ।

दर्शनाचार्या विमलेश बंसल ने कहा की शास्त्र की रक्षा के लिए शस्त्र आवश्यक है।उन्होंने कहा कि हमारा देश ऋषि - मुनियों का तथा सभी छहों ऋतुओं का सुख दिलाने वाला कृषि प्रधान देश है।यहां की संस्कृति सत्य सनातन वैदिक़ संस्कृति है।यहां प्रतिक्षण, प्रतिदिन,प्रतिमाह,प्रति वर्ष को एक उत्सव की तरह आशावादी हो मनाने अर्थात् आनन्द से जीने व मिलजुल कर परस्पर सहयोग कर शुभकामना बधाई देने की परंपरा आदि काल से चलती आ रही है।वर्ष में मुख्यतया जो बड़े पर्व मनाए जाते हैं वे चार हैं श्रावणी,विजयादशमी,दीपावली और होली,जिनमें चारों वर्ण चारों पर्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्हीं में से विजयादशमी पर्व क्षत्रियों में क्षत्र शक्ति जगाने, वीरता का प्रदर्शन करने का पर्व है।किसी भी राष्ट्र को समृद्ध व सुख शांति से भरने,शक्ति की उतनी ही आवश्यकता है जितनी ज्ञान की।बिना शक्ति के ज्ञान की रक्षा कभी नहीं हो सकती। अय,आय,अध्याय जिस राष्ट्र में न्यायोचित हैं वही राष्ट्र सुखी है। कोई भी न्याय शक्ति के बिना नहीं हो सकता,उसका आधार क्षत्रिय की शक्ति है। जिस राष्ट्र का राजा शक्तिशाली है वही राष्ट्र सुखी होता है। सम्यक न्याय करने के लिए ज्ञानबल-आत्मबल, मानसिक बल- बौद्धिक बल के साथ शारीरिक बल की भी बहुत आवश्यकता होती है।

इतिहास गवाह है ब्रह्म शक्ति और क्षत्र शक्ति के बल पर ही त्रेता में रामराज्य हो या द्वापर में पांडव राज्य सभी जगह ज्ञान और शक्ति के बल पर ही भारत- महान भारत, अखंड भारत बना। दुर्जन शक्ति को परास्त करने सज्जन शक्ति को संगठित करने वेदमय जीवन बनाना ही होगा। वेद कहता है-  ओ३म् यत्र ब्रह्म च क्षत्रं च--यजु0-२०-२५,  अतः एक बार अपने हाथ में शस्त्र उठाकर तो देखो तब आपको अनुभव होगा शत्रु चींटियों के समान है शस्त्र का होना ही आत्मविश्वास वर्धक महान औषधि है। अतः प्राकृतिक,सामाजिक,सांस्कृतिक,धार्मिक- विजय पर्व शक्ति पर्व- विजया दशमी पर हम सभी शास्त्रों के साथ शस्त्रों को भी वरण करने वाले बनें,जिससे हमारे वेद संस्कृति,सभ्यता, धर्म,राष्ट्र में सुरक्षित हो राष्ट्र को सुखी समृद्ध उन्नत कर सकें।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि यह दिन वीर पर्व के रूप में मनाया जाता है,इस दिन शस्त्र पूजन की पुरातन परंपरा है। हिन्दुओं के सभी देवी देवता शस्त्र धारी है वह शक्ति का संदेश देते हैं ।आर्य समाज महापुरुषों के चित्र को नही अपितु चरित्र को जीवन में अपनाने पर बल देता है ।

मुख्य अतिथि नरेन्द्र अरोड़ा ने विजय दशमी की शुभकामनाएं देते हुए हिन्दू समाज को एक जुट होने का आह्वान किया ।

अध्यक्षता करते हुए परिषद के गाजियाबाद के जिला मंत्री सुरेश आर्य ने कहा कि भारत वीरों का देश है हमें अपनी गौरव शाली परंपरा को अपनाना होगा और अपनी संस्कृति पर गर्व करना सीखें।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक दशहरा, विजयदशमी पर्व सिखाता है कैसे आप शक्ति के साथ भी मर्यादित रहें, धर्मनिष्ठ जीवन जियें।

गायिका प्रवीन आर्या,प्रतिभा खुराना, वीना वोहरा, नरेंद्र आर्य सुमन,विमला आहूजा, प्रतिभा कटारिया, जनक अरोड़ा,रजनी गर्ग,रजनी चुघ,आदि ने मधुर गीत सुनाये।

प्रमुख रूप से महेन्द्र भाई, आनन्द प्रकाश आर्य,ओम सपरा,आस्था आर्या,ईश्वर देवी,विजय चोपड़ा आदि उपस्थित थे।