पट्टी क्वीली की न्याय पंचायत मण गांव में आज भी जिंदा है सदियों पुरानी परंपरा

14 से 22 नवंबर तक बमण गांव में होगा नौरता(मंडाण) का यह विशाल आयोजन

वाचस्पति रयाल—समीक्षा न्यूज  




नरेंद्र नगर। देवभूमि के नाम से विश्व भर में विख्यात  उत्तराखंड अपने खास रीति-रिवाजों के लिए जाना जाता है। हालांकि बदलते वक्त और परिस्थितियों के चलते पहाड़ की पौराणिक परंपराएं दम तोड़ती नजर आ रही हैं, मगर आज भी कई क्षेत्र और गांव अपनी इन पौराणिक परंपराओं को जिंदा रखे हुए हैं।

इन्हीं पौराणिक परंपराओं को आज भी संवर्धित और जिंदा रखने का काम कर रही है विकासखंड नरेंद्र नगर में स्थित पट्टी क्वीली की न्याय पंचायत मणगांव। मणगांव न्याय पंचायत के एक दर्जन से अधिक गांव केंद्रीय स्थल बमण गांव में हर तीसरे वर्ष 9 दिनों तक पाँडव नृत्य(नौरता-मंडाण) का आयोजन सदियों से करते चले आ रहे हैं।

 बताते चलें कि पिछले 600 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा बमण गांव में हर 3 साल के बाद पांडव नृत्य के साथ अपने कुल/ईष्ट देवी-देवताओं का स्मरण व आह्वान करते हुए ढोल-दमाऊं की थाप पर एक विशेष तरह का नौरता-मडाण लगाया जाता है।जिसमें इस आयोजन करने वाले गाँवों के अलावा क्षेत्र के लोग चढ़कर हिस्सा लेते हैं। घंटाकर्ण धाम की चरणस्थली में बसे गांवों की ग्रामीणों की सदियों से चली आ रही यह आस्था ना शिर्फ़ पौराणिक संस्कृति,सभ्यता व रीति-रिवाजों की ध्वजवाहक है बल्कि हर आने वाली पीढ़ी इस बहुमूल्य विरासत से रूबरू होते चली जा रही है।  इन्हीं खास परंपराओं को लेकर इस क्षेत्र ने आज भी अपनी एक खास व अलग पहचान बनाई हुई है।  यहां यह भी बताते चलें कि गांव क्षेत्र की प्रसिद्धि के बारे में भगवान घंटाकर्ण धाम ट्रस्ट मंदिर समिति के अध्यक्ष विजय प्रकाश बिजल्वाण ने बताया कि बमण गांव-पोखरी में डिग्री कॉलेज,इंटरमीडिएट कॉलेज,अस्पताल,पोस्ट ऑफिस जैसे संस्थानों के होने तथा ठीक इसके ऊपर समुद्र तल से 8  हजार फिट की ऊंचाई पर विराजमान भव्य-दिव्य नवनिर्मित भगवान घंटाकर्ण मंदिर धाम में इसी माह की 12 नवंबर को प्रदेश के मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी के कर कमलों द्वारा पूजा अर्चना कर मंदिर भवन का लोकार्पण किया जाएगा। 

बमन गांव में 9 दिनों तक चलने वाले पंडों के नाम से विख्यात नौरता-मंडाण के आयोजन के लिए पंडित मनोहरी लाल की अध्यक्षता में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में नौरता-मंडाण संरक्षण मंडल तथा संचालन समिति का गठन किया गया। संरक्षण समिति में पीतांबर दत्त बिजल्वाण,मूर्ति सिंह रावत,भक्ति प्रसाद बिजल्वाण,दर्शन लाल बिजल्वाण आदि को सर्वसम्मति से चयन किए जाने के साथ इनके दिशा निर्देशन में संचालन समिति का गठन कर दिया गया है।

संचालन समिति में पू०जेष्ठ प्रमुख ईश्वरी प्रसाद बिजल्वाण को अध्यक्ष, ग्राम पंचायत बमणगांव के प्रधान दिनेश बिजल्वाण को सचिव तथा मुख्यमंत्री के पूर्व जनसंपर्क अधिकारी बुद्धि सिंह रावत को कोषाध्यक्ष चयनित करने के साथ ही नरेंद्र दत्त बिजल्वाण को मीडिया प्रभारी का दायित्व सौंपने के साथ ही कार्यकारिणी का गठन कर दिया गया है। संरक्षक मंडल और कार्यकारिणी ने अभी से पांडव नृत्य(नौरता-मंडाण) आयोजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं।

इस पौराणिक परंपरा के आयोजन में ये गांव हैं शामिल सदियों से चली आ रही पौराणिक परंपरा (पांडव नृत्य; नौरता-मंडाण) आस्था के साथ निभाने वाले गांवों में भटोली,दंदेली,बमण गांव, खुणकीधार,अंदरफी गांव, कंडारी गांव, पल़ोगी,पोखरी,ब्राह्मण खोला,मण गांव व सौंटियाल गांव आदि शामिल हैं। संचालन समिति के मीडिया प्रभारी नरेंद्र दत्त बिजल्वाण ने बताया कि आगामी 14 नवंबर से यज्ञ का शुभारंभ होगा, पंचम दिवस 18 नवंबर को (ध्वज,कुन्ती माता, पंडों का आह्वान) अष्टम दिवस 21 नवंबर को तीर्थ स्नान हेतु निशानों का प्रस्थान तथा 22 नवंबर को पंडित विनोद बिजवान के दिशा निर्देशन में यज्ञ की पूर्णाहुति होगी।