क्या गाजियाबाद में होगी झाडू साफ 'आप' की!


आप दिल्ली में जगते—जगते, गाजियाबाद आकर सो गयी

क्या ऐसे में जीत पायेगी आम आदमी पार्टी एनसीआर की एक भी सीट?

धनसिंह—समीक्षा न्यूज   



गाजियाबाद। आम आदमी पार्टी जिसे जनता की पार्टी कहा जाता है जो अन्ना हजारे के आन्दोलन से निकलकर आज दिल्ली में पूर्ण बहुमत से काबिज है या यह भी कह सकते हैं कि दिल्ली में पूर्णतय काबिज है। अरविन्द केजरीवाल मुख्यमंत्री के नेतृत्व में दिल्ली का चहुंमुखी विकास करने बाद अब आम आदमी पार्टी पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड सहित अन्य राज्यों में अपनी सरकार बनाने की तैयारी करने में जुटी है। अरविन्द केजरीवाल के दिशा निर्देशन पर कार्यकर्ताओं एवं उनके पदाधिकारियों द्वारा एक ही बात कही जा रही है कि दिल्ली की तर्ज पर ही सरकार बनने के बाद इन राज्यों का चहुंमुखी विकास कराया जायेगा। सरकार प्रत्येक नागरिक को सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचायेगी। जिसक प्रकार दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने प्रत्येक व्यक्ति के घर घर जाकर उनकी परेशानियों को सुनकर उन्हें उन परेशानियों से उबारा है उसी प्रकार हम अन्य राज्यों में भी कार्य करेंगे और जनता का विश्वास हासिल कर पूर्ण बहुमत से सरकार बनाकर जनता की सेवा करेंगे। 

कैसा होगा चहुंमुखी विकास, जब....!

सूत्रों की माने तो दिल्ली से सटे जनपद गाजियाबाद में 5 विधासभा सीट है जिसमें से आम आदमी पार्टी ने 4 विधानसभा सीट के प्रत्याशी घोषित कर दिये है। जिनमें लोनी से डॉ.सचिन शर्मा, साहिबाबाद से डॉ.छवि यादव, मुरादनगर से महेश यादव व मोदीनगर से महेन्द्र शर्मा आने वाले विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी के सम्भावित प्रत्याशी है जिसमें गाजियाबाद की सीट पर अभी किसी प्रत्याशी का नाम नहीं खोला गया है। 

पूर्व में डॉ.प्रगति त्यागी मेयर प्रत्याशी आम आदमी पार्टी एवं मेयर पद जीतने के लिए काफी जद्दोजहद की फिर वह जीत नहीं पाई और चौथे नम्बर पर आई इतनी मेहनत के बाद भी वह गाजियाबाद में आम आदमी पार्टी की कोई खास छाप नहीं छोड़ पाई। 

हम वर्तमान में आम आदमी पार्टी के विधानसभा प्रत्याशियों की बात करे तो ऐसा लग रहा है कि उन्हें विधानसभा चुनावों में अपनी हार जीत से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है शायद यह भी हो सकता है कि वे सिर्फ अपने नाम के साथ पूर्व विधानसभा प्रत्याशी लिखवाने के लिए ही चुनाव के लिए आगे आये हो। क्योंकि उक्त विधानसभा प्रत्याशियों द्वारा ना तो विशेष कोई जनता मिलन कार्यक्रम, ना ही चुनाव की तैयारी जैसे कोई कार्य और न ही मीडिया से सम्पर्क कर कोई प्रेस मीटिंग करवाई जा रही है। उन प्रत्याशियो में से कुछ तो आराम फरमा रहे हैं और कुछ सोशल मीडिया पर टैगिंग और चैटिंग और शेयरिंग खेलकर प्रचार प्रसार कर रहे और जैसे ही कोई बड़ा नेता आता है तो वैसे ही यह दिखाते हैं कि वे अपनी पार्टी के प्रति कितने जुझारू, कर्मठ, ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और जागरूक है। सूत्रों की माने तो अभी तक आम आदमी पार्टी द्वारा जो प्रेस कांफ्रेंस कराई गयी है उनमें भी पार्टी के उच्च पदाधिकारियों द्वारा पत्रकारों के साथ बदसलूकी से पेश आ गया है। जिसका दुष्परिणाम शायद आने वाले चुनावों में पार्टी पर पड़ सकता है, पार्टी हाई कमान को इस ओर भी ध्यान देना चाहिए। सीधी भाषा में कहा जाये तो दिल्ली की आप पार्टी दिल्ली में जागते जागते गाजियाबाद में आकर सो गयी। जब यहां दिल्ली के समीप ही ऐसा हाल है तो अन्य क्षेत्रों में क्या होगा?