आर्य समाज,कविनगर के 45वें त्रिदिवसीय वार्षिकोत्सव का हुआ शुभारंभ




समीक्षा न्यूज—दीपेन्द्र सिंह

परमेश्वर जगत में अनुभूतिक सत्ता है -- स्वामी सूर्य वेश

आनंद की प्राप्ति के लिए हमें परमेश्वर की उपासना करनी चाहिए- स्वामी महेश योगी

गाजियाबाद। आर्य समाज कविनगर के 45वें त्रिदिवसीय वार्षिक उत्सव का शुभारंभ स्वामी महेश योगी द्वारा महायज्ञ करा कर प्रारंभ हुआ।

यज्ञोप्रांत डॉ रामप्रकाश शर्मा सरस पूर्व सदस्य हिंदी सलाहकार समिति रक्षा मंत्रालय की अध्यक्षता में ईश्वर का स्वरूप विषय पर सभा प्रारंभ हुई। 

महायज्ञ के ब्रह्मा स्वामी महेश योगी ने ईश्वर का स्वरूप विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि यह ब्रह्माण्ड परमात्मा का चित्र है इस चित्र को देखकर हमें उसके चरित्र को जानना है।यजुर्वेद के 40 वें अध्याय के पहले मंत्र में बताया है कि ईश्वर संसार के कण-कण में व्यापक है,यह शब्द प्रमाण है।जहां जहां धुआं है वहां वहां अग्नि होगी यह अनुमान प्रमाण है। जगत में जो भी गति हो रही है वह गति ईश्वर कर रहा है प्रकृति सत्य है,जीवात्मा भी सत्य और चेतन  है,परमात्मा सत्य,चेतन और आनंद स्वरूप है।परमात्मा प्रकृति जीव और उसके कर्मों को जानता है। चेतन होने के साथ-साथ जहां गति देनी होती है वह देता है प्रेरणा देना प्रभु का काम है।आनंद की प्राप्ति के लिए हमें उसकी उपासना करनी चाहिए।

मुख्य अतिथि के रुप में पधारे अखिल भारतीय योग संस्थान के पूर्व महामंत्री श्री देवेंद्र हितकारी ने ध्यान साधना का अभ्यास कराया।

स्वामी सुर्यवेश ने कहा कि जिस तरह भूख,प्यास और स्नेह को हम महसूस करते हैं,यह अमूर्त द्रव्य है,इसी तरह चेतन आत्मा को ही उस परमेश्वर की अनुभूति होती है,उसको महसूस किया जा सकता है,बताया नहीं जा सकता।परमेश्वर जगत में अनुभूतिक सत्ता है।जिस तरह अग्नि अपने केंद्र बिंदु सूर्य की ओर दौड़ती है जल अपने केंद्र बिंदु समुद्र की ओर दौड़ता है इसी तरह जीवात्मा अपने केंद्र बिंदु परमात्मा की ओर आत्मानंद हेतु जाएगी जो बाधाएं राह में आएं उन्हें निर्मूल कर दें, यम,नियम,अष्टांग योग द्वारा अपने आत्मा को स्वच्छकर उसके योग्य बनाओ फिर वह आपको चुन लेगा और आपको परमेश्वर की आनन्दानुभूति हो जाएगी।

डॉक्टर डॉ राम प्रकाश शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि हम सब दुनिया के इंसान एक परमात्मा की संतान हैं यदि ऐसा सब समझ जाएं तो दुनिया में तनातनी खत्म हो सकती है। वेद जिस ईश्वर की बात करता है वह मानव मात्र के लिए है उसकी कोई प्रतिमा,आकार नहीं है अगर हम कोई आकार बना रहे हैं,वह हमारी कल्पना के आधार हैं, मनुष्य के दिमाग की उपज है। परमेश्वर इन कल्पनाओं से मुक्त है।जिस दिन आप स्वामी दयानंद के अनुसार अपने जीवन को बना लेंगे तो दूसरे लोग भी आपके व्यवहार को देखकर बदल जाएंगे।ईश्वर हम सबके अंदर व्याप्त है।कर्म करने में हम स्वतंत्र हैं,परन्तु फल उसके अधीन है।

मंच का कुशल संचालन यशस्वी मंत्री वीरेंद्र कुमार धामा ने करते हुए बताया की शुक्रवार से प्रारंभ हुए वार्षिक उत्सव में तीनो दिन 12 दिसम्बर तक प्रातः 8 से 11 तक एवं सायं कालीन सत्र 2 से 5 तक  में विभिन्न सम्मेलन होंगे।उन्होंने अधिक से अधिक आर्य जनों से उपस्थित रहने की अपील की।

इस अवसर पर मुख्य रूप से आर्य केंद्रीय सभा के प्रधान चौधरी सत्यवीर सिंह, लक्ष्मण सिंह चौहान,विजय मित्तल,सीपी अग्रवाल,सत्य पाल आर्य, बृजपाल गुप्ता,नीलिमा चिकारा, उषा अग्रवाल,सुमन चौहान आशा आर्य प्रमोद शास्त्री एवं प्रवीण आर्य आदि मौजूद रहे।