ज्ञानपीठ केंद्र में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की मनाई जयंती


धनसिंह—समीक्षा न्यूज 

साहिबाबाद। ज्ञानपीठ केंद्र 1 स्वरूप पार्क जीटी रोड साहिबाबाद के प्रांगण में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले जी की जयंती का कार्यक्रम लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट द्वारा आयोजित गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर राजेंद्र यादव ने किया । अंशु ठाकुर ने कार्यक्रम का आयोजन कर संचालन किया । प्रोफेसर राजेन्द्र यादव, ऋषिपाल , विजेंदर कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित किया कार्यक्रम में शामिल में शामिल सभी साथियों ने महात्मा ज्योतिबाराव फुले के चित्र पर पुष्पर्पित कर उन्हें स्मरण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रोफेसर राजेन्द्र यादव ने महात्मा ज्योतिराव फुले के जीवन संघर्ष के बारे  में बताया जिस तरह से उन्होंने हंटर कमीशन के माध्यम से समाज के कमजोर वर्गों के लिए शिक्षा में आरक्षण का द्वार खोला गया उन्होंने बताया कि महात्मा ज्योतिबाराव फुले जी का जो काम बच गया उसे हमे पूरा करना है।

अंशु ठाकुर ने अपने सम्बोधन में कहा कि महात्मा ज्योतिबाराव फुले ने महिला शिक्षा में बहुत क्रांति करने का  काम किया वो हमेशा विधवा विवाह के  समर्थक रहे ,किसानों की लड़ाई लड़ते रहे ज्योतिबा मैट्रिक पास थे और उनके घर वाले चाहते थे कि वो अच्छे वेतन पर सरकारी कर्मचारी बन जाए लेकिन ज्योतिबा ने अपना सारा जीवन दलितों की सेवा में बिताने का निश्चय किया था। उन दिनों में स्त्रियों की स्तिथि बहुत खराब थी क्योंक घर के कामो तक ही उनका दायरा था। बचपन में शादी हो जाने के कारण स्त्रियों के पढने लिखने का तो सवाल ही पैदा नही होता था। दुर्भाग्य से अगर कोई बचपन में ही विधवा हो जाती थी तो उसके साथ बड़ा अन्याय होता था। तब उन्होंने सोचा कि यदि भावी पीढ़ी का निर्माण करने वाली माताए ही अंधकार में डूबी रहेगी तो देश का क्या होगा और उन्होंने माताओं के पढने पर जोर दिया था।

उन्होंने विधवाओ और महिला कल्याण के लिए काफी काम किया था। उन्होंने किसानो की हालत सुधारने और उनके कल्याण के भी काफी प्रयास किये थे। स्त्रियों की दशा सुधारने और उनकी शिक्षा क्व लिये ज्योतिबा और उनकी पत्नी ने मिलकर 1848 में स्कूल खोला जो देश का पहला महिला विद्यालय था। उस दौर में लडकियों को पढ़ाने के लिए अध्यापिका नही मिली तो उन्होंने अपनी पत्नी सावित्रीबाई को पढाना शुरू कर दिया और उनको इतना योग्य बना दिया कि वो स्कूल में बच्चो को पढ़ा सके उनका सपना था कि भारत की महिला जब तक सशक्त नही होंगी तब तक भारत का विकास नही होगा।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से शामिल रहें अंशु ठाकुर, प्रोफेसर राजेन्द्र यादव,स्वामीनाथ मिश्रा,शिव शंकर यादव, भानु यादव, एसएस प्रसाद,विजेंद्र कुमार, ऋषिपाल, विश्वनाथ यादव,वीरेंद्र गोस्वामी, हरिशंकर यादव, अखिलेश शुक्ला, हरिकिशन, केदार, पटेल, अंकित आदि लोग शामिल रहें।