पत्रकारिता दिवस पर महिला पत्रकारों के समक्ष चुनौतियां परिचर्चा


धनसिंह—समीक्षा न्यूज

जिस प्रकार अंधेरे को प्रकाश भर देता है उसी प्रकार हर समस्या का निवारण होता है-- महंत नारायण गिरी

गाजियाबाद दूधेश्वर मंदिर में पत्रकारिता  दिवस पर  गाजियाबाद महिला पत्रकारों ने एक परिचर्चा की और पत्रकारिता दिवस मनाया। 

पत्रकार अपनी कलम से समाज में घटित हर तरह की घटनाओं को संबंधित लोगों तक पहुंचाने और समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है जिसमें अब महिलाएं भी अपना परचम लहरा रही हैं किंतु पत्रकारिता के क्षेत्र में महिलाओं के लिए बहुत सारी चुनौतियां सर उठा कर खड़ी रहती हैं । पत्रकार मीनाक्षी शर्मा ने बताया  आज गाजियाबाद की कुछ महिलाओं ने दूधेश्वर नाथ मंदिर परिसर में पत्रकारिता में महिलाओं के समक्ष चुनौतियों पर एक परिचर्चा की और उस समस्या से निकलने का निवारण तलाश किया । परिचर्चा में सभी ने अपने अपने विचार व्यक्त किए और यह भी तय किया कि हम इस तरह की परीचर्चा व गोष्ठी आगे भी करते रहेंगे । अन्य महिलाओं को भी अपने साथ लेकर चलेंगे ताकि सभी कंधे से कंधा मिलाकर चल सके और समानता के साथ समाज में अपने कार्य क्षेत्र में मान सम्मान प्राप्त कर सके। 

कार्यक्रम की शुरुआत में दूधेश्वर मंदिर के महंत श्री नारायण गिरी जी ने  अपना आशीर्वाद देते हुए यह विचार व्यक्त किए की महिलाएं  पत्रकारिता में बहुत सारी समस्याओं का सामना करती हैं ।उन्हें बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखने पड़ते हैं ।बहुत सारी विपरीत स् परिस्थितियों में भी कार्य करना पड़ता है। महिला पत्रकारों के सामने बहुत सारी कठिनाइयां आती है। जिनका सामना करते हुए आगे बढ़ती हैं  । जैसे कमरे में कितना भी अंधेरा क्यों ना हो सिर्फ एक दिया उस पूरे कमरे को प्रकाश से भर देता है उसी प्रकार समस्या का निवारण होता है, महिलाएं भी अपने कार्य क्षेत्र में आने वाली बड़ी से बड़ी समस्याओं को अपनी शक्ति से खत्म कर देती हैं और आगे बढ़ रही हैं । महिलाए जो यह कार्य कर रही हैं यह बहुत ही दुर्लभ कार्य है । आप सब महिलाए  अपनी हिम्मत से इसमें आगे बढ़ती जा रही हैं, उसके लिए आप सभी  महिलाो पत्रकारों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।  

उसके बाद सभी महिला पत्रकारों ने अपने अपने विचार व्यक्त किए इस प्रकार हैं--

कमलेश भारद्वाज ने कहा यह पुरुष प्रधान समाज है यहां पर महिलाओं को अपना स्थान बनाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है ।उसी तरीके से पत्रकारिता में भी पुरुष के सामने महिलाओं को कार्य करने में कठिनाइयां होती हैं जिससे आगे निकलने में और कार्य करने में बाधा उत्पन्न होती जो कि नहीं होनी चाहिए लेकिन हमें बहुत हर्ष महसूस होता है कि आज बहुत सारी महिलाएं निडर होकर पत्रकारिता कर रही हैं।  और चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ रही हैं। 

मीनाक्षी  शर्मा ने कहा महिलाओं के प्रति लोगों को अपनी सोच बदलनी चाहिए कि वह कमजोर है और कोई भी कार्य ठीक से नहीं कर सकती है। आज के युग में महिला हर तरीके से सक्षम है ,सबल है ,वह किसी भी कार्य को बहुत अच्छे से कर सकती हैं। जिसमें यदि दूसरे लोगों से, पत्रकार बंधुओं से, समाज से, सरकार से, शासन प्रशासन से सहयोग मिले तो और भी ज्यादा मजबूती आएगी । महिला पत्रकारों को समाज में  स्थान और सम्मान दोनों प्राप्त होना चाहिए ।  पत्रकारों  के ऊपर खबर छापने और ना छापने को लेकर दबाव बना रहता है जो नहीं होना चाहिए ऐसे में एक दूसरे का सहयोग समस्या का निवारण दे सकता है। 

सुनीता उपाध्याय ने कहा महिला पत्रकार को समाज अच्छी नजर से नहीं देखता यदि वह किसी कैमरामैन के साथ या किसी अपने सहयोगी के साथ जाती है तो लोग गलत सलत बातें बनाना शुरु कर देते हैं उन्हें खुलकर काम करने नहीं दिया जाता, उनके चरित्र पर और उनके कार्य पर हमेशा सवाल खड़ा किया जाता है। जो कि बहुत गलत है ।पुरुषों को आगे आकर महिला पत्रकारों का सहयोग देना चाहिए ।उन्हें शक्ति देनी चाहिए। उनका ताकि उनका मनोबल बढ़ सके और वह अपने कार्य को अच्छी तरीके से कर सके और आगे बढ़ सके। 

कल्पना आर्य ने कहा महिलाएं आज हर तरीके से सक्षम है उन्हें किसी के सहारे की आवश्यकता नहीं है बेशक यह पुरुष प्रधान समाज है ।आज भी महिला पत्रकार जब जाकर पुरुष पत्रकारों के बीच में बैठती है तो उसे हंसी का पात्र बनाया जाता है जिससे वह हीन भावना से ग्रसित हो जाती है और उसका मनोबल टूटने लगता है। ऐसे में महिलाओं को अपने अंदर मजबूती लानी चाहिए। अपनी शक्ति को पहचानना चाहिए और निडर होकर अपना कार्य करना चाहिए। आज हमें किसी के किसी भी पुरुष के सहारे की आवश्यकता नहीं है महिलाएं इतनी सफल है कि वह अपने कार्य क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। 

रीटा माही ने कहा  पत्रकारिता क्षेत्र को बहुत साल हो चुके हैं हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं ।आज महिलाएं भी पत्रकारिता कर रही हैं और हर चुनौती का सामना करते हुए आगे बढ़ रही है। लेकिन असुरक्षित है उन को सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए और महिलाओं को निडर होकर अपने कार्य में आगे बढ़ते रहना चाहिए ।