पत्रकारों व कवियों को हमेशा याद रहेंगे राष्ट्रीय कवि कृष्ण मित्र

   


 

सुशील कुमार शर्मा- स्वतंत्र पत्रकार- समीक्षा न्यूज 

गाजियाबाद। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के साथ पत्रकारिता  करने वाले और उनकी चुनावी जनसभाओं में अटल जी से पहले अपनी गर्जती आवाज में ओज की कविता से अपार जनसमूहों का हमेशा स्नेह पाने वाले गाजियाबाद के नवरत्नों में शुमार ओज के राष्ट्रीय कवि व वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण मित्र पत्रकारों व कवियों को हमेशा याद रहेंगे।  इसका आभास उनकी शोक सभा में उमड़े जनसैलाब से हो रहा था। जिसके लिए लगभग एक हजार की क्षमता वाले दीन दयाल उपाध्याय सभागार भी छोटा  पड़ गया । अम्बेडकर रोड ,नेहरू नगर फ्लाईओवर वाली रोड  व वसंत रोड बहुत देर तक जाम रही। दरअसल कृष्ण मित्र जी इस महानगर की ऐसी ही शख्सियत थे। उन्हें कभी किसी पर क्रोधित होते हुए नहीं देखा। अपने छोटों से भी ऐसे मिलते थे जैसे वह उससे भी छोटे हैं। देश के चहेते कवियों की आंखों में भी पानी था।  हरि ओम पंवार ने बताया मैं तो उन्हें सुनकर कवि बना ।संचालन कर रहे दिग्गज कवि  प्रवीण शुक्ल के संचालन में हुई इस श्रद्धांजलि सभा में बोलने वाले सभी वक्ता शोक संतप्त थे। उनकी स्मृति को चिरस्थाई बनाए जाने की घोषणा की गई। सभी राजनीतिक दलों के लोग और तमाम पत्रकार वहां दिखाई दे रहे थे।

उल्लेखनीय है देश के सभी वरिष्ठ कवियों के साथ उन्होंने काव्य पाठ किया है।  लाल किले के प्रसिद्ध अ. भा. कवि सम्मेलन में लगातार 16 वर्ष तक उन्होंने काव्य पाठ किया है। देश के प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर, गोपाल प्रसाद व्यास,काका हाथरसी, ओम प्रकाश आदित्य, गोपाल दास नीरज, रामावतार त्यागी, देवराज दिनेश, हुल्लड़ मुरादाबादी, संतोषानंद, हरिओम पंवार आदि में से अधिकांश उनके निवास पर भी आये हैं। राष्ट्रकवि सोहन लाल द्विवेदी ने उनके बारे में कहा था कि कविवर कृष्ण मित्र की प्रभावी कविताएं सुनने का सुयोग मुझे अनेक अखिल भारतीय कवि सम्मेलनों के मंच पर प्राप्त हुआ। जनता ने उन्हें बार-बार सराहा और मैं भी स्वयं उनसे रसविभोर हुआ हूं।पद्मभूषण  गोपालदास नीरज ने कहा था कि कृष्ण मित्र राष्ट्रीय चेतना सम्पन्न एक तेजस्वी कवि हैं। कुसुम सुवास के समान उनकी ख्याति प्रदेश की सीमाओं को लांघकर पूरे देश में फैल रही है। उनकी वाणी में सिंह की गर्जना है। उनका शब्द -शब्द एक चिंगारी के समान जन मन को स्पर्श करता है। बाल कवि बैरागी ने उनके बारे में कहा था कि कृष्ण मित्र अपनी पीढ़ी की उर्जा और अस्मिता के अनुगायक हैं। शोषित और स्वेद को उन्होंने सूझबूझ के साथ लिखा है।उनको पढ़ना और सुनना एक सम्मोहन जैसा है।कथ्य और शिल्प की दृष्टि से भी मित्र कहीं -कहीं बिल्कुल अकेले हैं। आचार्य क्षेमचंद्र सुमन ने कहा था कि राष्ट्रीय जन जागरण और समाज सुधार की दृष्टि से प्रिय कृष्ण मित्र ने अपनी प्रतिभा और मनस्विता का जो सदुपयोग किया है वह सबके लिए आदर्श प्रस्तुत करने वाला है। गोपाल प्रसाद व्यास ने उनके संबंध में कहा था कि मैंने उन्हें गोष्ठियों में भी सुना है और कवि सम्मेलनों में भी सुना है। जहां -तहां छपने के बाद उनकी रचनाएं भी पढ़ी है। मुझे यह कवि सदैव पंक्ति से अलग लगा है। मुझे यह लगता है ,वह जो देखता है, सुनता है और अनुभव करता है , उसे वह ईमानदारी से व्यक्त करता है। गाजियाबाद को अपने इस मानस पुत्र पर गर्व है।

दो दशक पूर्व तक पुरातन पत्रकारों की संस्था गाजियाबाद जर्नलिस्ट्स   क्लब  के मेरी  अध्यक्षता  में वर्ष  में  चार  वृहद आयोजन  होते थे ।वह आयोजन कृष्ण मित्र जी की सरपरस्ती में ही हमने किये हैं। यह आयोजन  हमने डेढ़ दशक से भी अधिक समय तक प्रति वर्ष किये हैं। नववर्ष पर हम चौधरी भवन में गाजियाबाद जनपद के कवियों के सम्मान में कवि सम्मेलन का आयोजन करते थे जिसमें देश के जाने -माने कवियों से जनपद के कवियों के सम्मान की श्रंखला शुरू की गयी थी। होली पर वृहद होली मिलन समारोह  कवि नगर रामलीला मैदान के समीप आफीसर्स क्लब मैदान में प्रति वर्ष अलग- अलग नामों से करते थे। उसी नाम के अनुरूप मुकुट अतिथियों को पहनाए जाते थे । उसमें एक हास्य कवि व एक रंगकर्मी के सम्मान की श्रंखला शुरू की थी।  पदेन और पूर्व अधिकारी और राजनीतिक शख्सियत पूर्व सांसद विधायक, उसमें आमने -सामने बैठे होते थे। राजनीति में आये चर्चित डीपी यादव व मदन भैया भी राजनीतिक नेताओं के बीच वर्षों तक विराजमान रहे हैं। उस आयोजन में अधिकारियों   और राजनीतिक शख्सियतों की वर्ष भर रही छवि पर कटाक्ष करता पैरोडी गीत व नाटिका उनका मूंह लाल कर देती थी।पदेन सांसद रमेश चन्द्र तोमर व कई  दलों में मंत्री रहे राज पाल त्यागी भी अपने ऊपर टिप्पणी पर तिलमिला उठे थे। नाटिका के मुख्य पात्रों में रहने वाले रंगकर्मी निशीकांत दीक्षित आज मुंबई फिल्म नगरी के सफल सह अभिनेता हैं जो सभी बड़े अभिनेता और अभिनेत्रियों के साथ काम कर चुके हैं और कर रहे हैं। तीस मई हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मेला प्लाजा होटल में भव्य पत्रकारिता दिवस का आयोजन करते थे जिसमें दिवंगत शहीद पत्रकार गणेश शंकर विद्यार्थी, दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार चन्द्र भान गर्ग, दैनिक हिन्दुस्तान (जो गाजियाबाद के पहले पत्रकार थे), मेरे पिता दिवंगत  वरिष्ठ पत्रकार श्याम सुंदर वैद्य (जो तड़क वैद्य के नाम से मशहूर थे) उन्होंने 1961 में अपना सा.युग करवट अखबार शुरू किया था, जिसे 1973 से मैंने संभाला था, दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार चिरंजी लाल पाराशर  (दैनिक नवभारत टाइम्स) जिनके पुत्र राकेश पाराशर  दैनिक नवभारत टाइम्स के गाजियाबाद ब्यूरो चीफ रहे हैं व दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार योगेन्द्र पाल बागी (उर्दू अखबारों के पत्रकार) की स्मृति में जनपद के पत्रकारों के सम्मान की श्रंखला आयोजित की थी। यह आयोजन हम मेला प्लाजा होटल के सभागार में करते थे।  दीपावली पर चौधरी भवन में गंगा- जमुनी काव्य संध्या का आयोजन कर महानगर निवासी शायरों के सम्मान की श्रंखला शुरू की थी। सभी आयोजनों में अतिथियों  के चयन और उन्हें  लाने की जिम्मेदारी  देश के जाने- माने वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप तलवार व  शिव कुमार गोयल, पत्रकार व मेयर रहे तेलूराम कांबोज, दिग्गज कथाकार से. रा. यात्री व इन सभी के चहेते कृष्ण मित्र जी व उस्ताद शायर मासूम गाजियाबादी जी होते थे। पत्रकार रवि अरोड़ा, कृष्ण मित्र और मासूम गाजियाबादी ही पैरोडी और नाटिका लिखते थे और एक माह पूर्व से ही पत्रकार अरविन्द मोहन शर्मा की कमला गैस एजेंसी के परिसर में अर्द्ध रात्रि तक रिहर्सल करते थे। मित्र जी और हमारे अखबार का आफिस लायर्स चैम्बर में पास- पास था इसलिए हम दोनों तो वर्ष भर ही रोजाना एक बार जरूर साथ बैठते थे।  जब कुछ जिम्मेदार पत्रकार साथियों के आयोजन की आड़ में स्वयं आर्थिक लाभ उठाने की जानकारी मिली तो मैंने यह आयोजन बंद कर दिए थे। उसके बाद फिर इस तरह के आयोजन कोई नहीं कर पाया। कृष्ण मित्र जी मेरे इस निर्णय से सहमत थे।