रामदुलार यादव के नेतृत्व में मनाई प्रथम राष्ट्रपति ड़ा0 राजेन्द्र प्रसाद की जयंती

 



गाजियाबाद। विलक्षण प्रतिभावान, स्वतन्त्रता सेनानी, भारत रत्न, देश के प्रथम राष्ट्रपति ड़ा0 राजेन्द्र प्रसाद का जन्म दिन ज्ञान पीठ केन्द्र 1, स्वरूप पार्क जी0टी0 रोड साहिबाबाद के प्रांगण में आयोजित किया गया, कार्यक्रम में शामिल सभी महानुभावों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हे स्मरण किया, उनके सम्मान में जोरदार गगन भेदी नारे लगाये गए, महान क्रांतिकारी जिन्होने बहुत ही कम उम्र में देश की आजादी के लिए फांसी के फंदे को चूम लिया, खुदी राम बोस की कुर्बानी को भी याद किया गया, सभी ने संकल्प लिया कि देश की एकता, अखंडता के लिए सदैव हम इन महा पुरुषों के कृतित्व और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेते रहेगें।

लोक शिक्षण अभियान ट्रस्ट के संस्थापक/अध्यक्ष शिक्षाविद राम दुलार यादव ने कहा कि ड़ा0 राजेन्द्र प्रसाद चंपारण के किसान आंदोलन से महात्मा गांधी के संपर्क में आए तथा पूरा जीवन भारत माँ को ब्रिटिश शासन की गुलामी से  मुक्त कराने के लिए संघर्ष किया, यातनाएँ झेली, देश जब आजाद हो गया संवैधानिक रूप से भारत के राष्ट्रपति बने, वह संविधान सभा के अध्यक्ष रहे, उन्हे भारत के सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने में उनके योगदान के कारण भारत रत्न सम्मान मिला, वह हिन्दू-मुस्लिम एकता के पक्षधर उदारवादी नेता थे, कट्टरवादी, सामंतवादी ताकतों के प्रबल विरोधी थे, उनका मानना था भारत की एकता और अखंडता, भाईचारा, सद्भाव, प्रेम और सभी को समान अवसर से ही मजबूत होगी। वह इसी प्रयास में पूरे जीवन लगे रहे, हमे उन्हे स्मरण करते हुए गर्व है इनकी ईमानदारी, नैतिकता ने देश को नई दिशा दी इसलिए राजेन्द्र बाबू को महात्मा गांधी ने देश रत्न से अलंकृत किया था।

शहीद क्रांतिकारी खुदीराम बोस की जयंती पर उन्हे स्मरण करते हुए कहा कि अँग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध अल्पायु में ही आप में इतनी भारत माता की गुलामी की वेदना थी कि देश को आजाद कराने में हँसते-हँसते फांसी के फंदे को चूम लिया, हम ऐसे भारत माँ के शहीद लाडले के जीवन से प्रेरणा ले गौरान्वित होते है, देश की एकता और अखंडता के लिए संकल्प लेते है कि कभी भी संविधान और आजादी पर आंच नहीं आने देगें। 

कार्यक्रम में शामिल रहे, चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी अवधेश यादव, अंशु ठाकुर, गुड्डू यादव, केदार सिंह, प्रेम चंद पटेल, हरिशंकर यादव, गुल शेख, सुभाष यादव, हरीकृष्ण, प्रेम नारायण , विजय मिश्र, सम्राट सिंह यादव, शिवानंद चौबे, हरीश ठाकुर, विजय पाल, संजीव राय एडवोकेट,  सच्चिदानंद वर्मा आदि।