"गीता सुगीता कर्तव्या" पर गोष्ठी संपन्न



धनसिंह—समीक्षा न्यूज  

*गीता मानव,राष्ट्र व समाज के उत्थान के लिए हे-डा.कल्पना रस्तोगी*

गाजियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में "गीता सुगीता कर्तव्या" विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह करोना काल से 478 वाँ वेबिनार था।

मुख्य वक्ता डा. कल्पना रस्तोगी ने कहा कि गीता जयंती के अवसर पर स्मरण हो आया महर्षि वेदव्यास के इस वाक्य का कि "गीता सुगीता कर्तव्या", जिसका अर्थ है श्रीकृष्ण द्वारा प्रणीत भगवद  गीता का भली प्रकार सुगायन करना चाहिए।यहाँ सुगायन करने का अर्थ मात्र गीता के श्लोको को कंठस्थ करके गाने से नहीं है इसका अर्थ है गीता को भली प्रकार पढ़कर,उसके अर्थ और भावो को समझकर उन पर मनन कर अपने अंत: करण में धारण कर लेना चाहिए यानि गीता के अनुसार जीवन बिताना 

चाहिए,तब तो गीता का पठन करने या श्रवण करने  से लाभ है अन्यथा नहीं।

गीता वेद उपनिषदों का ही सार है इसमें कोई संदेह नहीं।वेद धर्म का आधार हैं,वेद जहाँ एक और  ज्ञान के भंडार है तो साथ ही कर्म और उपासना के भी अक्षय स्रोत  हैं।इसलिए वेद पूर्ण रूप से धर्म का आधार हैं और इन वेदो के अधिकांश सिद्धांतो को  गीता में वर्णित किया गया है।जैसे उदहारण के तौर पर ले तो वर्ण व्यवस्था ले लीजिए,गीता का वर्ण सिद्धांत पूर्ण रूप से गुण कर्म पर आधारित है जन्म पर नहीं। 

अष्टादश अध्याय में कृष्ण गुण कर्म के आधार पर वर्ण विभाजन का विस्तृत वर्णन करते है।चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं गुणकर्म विभागश:।संक्षेप में कहें तो भगवान् कृष्ण के द्वारा दिए गए उपदेश वेदो की ही आज्ञा है।

गीता में ऐसे महान सन्देश छिपे हैं जो प्रत्येक आयु के लोगों को चाहे वो युवा हो या वृद्ध हों,सभी की समस्याओ का समाधान प्रस्तुत करते हैं।गीता को यथारूप समझने का अवसर मिल  जाए तो स्पष्ट हो जाएगा कि वेदो की तरह ही गीता का धर्म भी राष्ट्र उत्थान,समाज उत्थान एवं मानव उत्थान का मार्ग है और  जीवन की सभी समस्याओ का समाधान इसमें है।किम कर्तव्यविमूढ़ होने की अवस्था में यह हमारा मार्ग प्रशस्त करती है,इसमें दिए गए उपदेशो का किसी भी धर्म विशेष से कोई लेना देना नहीं है यह तो सर्व जन हिताय है।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि पुरुषार्थ ही इस दुनियां में सब कामना पुरी करता है मन चाहा फल उसने पाया जो आलसी बनकर पड़ा न रहा।

मुख्य अतिथि आर्य नेता डालेश त्यागी व अध्यक्ष प्रतिभा कटारिया ने कर्म करने पर जोर दिया कि व्यक्ति को खाली या आलसी नही बैठना चाहिए।

राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

गायिका कुसुम भंडारी, कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, कमला हंस, कमलेश चांदना, ईश्वर देवी, सुनीता अरोड़ा, कृष्णा पाहुजा आदि के मधुर भजन हुए।