मैक्स अस्पताल वैशाली में की गई देश की पहले ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी

-43 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अफसर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई



-पत्नी ने डोनेट की अपनी किडनी, बहुत जटिल था ये केस

देवेन्द्र तौमर—समीक्षा न्यूज 

वैशाली/गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के लीडिंग अस्पतालों में शामिल मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल वैशाली में किडनी के एक पेशंट का सफल इलाज किया गया. 43 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अफसर अंतिम स्टेज की किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे. उनकी जान बचाने के लिए ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई. ये अपनी तरह की देश की पहली सर्जरी है.

इस सफल सर्जरी को मैक्स अस्पताल के डॉक्टर अनंत कुमार के नेतृत्व में किया गया. उनकी टीम में डॉक्टर मनीषा दस्सी, डॉक्टर शैलेंद्र गोयल, डॉक्टर विमल दस्सी और डॉक्टर उपवन चौहान थे, जिन्होंने मिलकर ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की.

ये केस बहुत ही चुनौतीपूर्ण, बेहद जटिल और संवेदनशील था. जो किडनी डोनर थे, उनके गुर्दे फैल गए थे और मरीज की किडनी एथेरोस्क्लेरोसिस से पूरी तरह से ब्लॉक हो गई थी.

43 वर्षीय रिटायर्ड पुलिस अफसर अजय मलिक क्रोनिक किडनी रोग के कारण लगभग तीन सालों से हेमोडायलिसिस और दवाओं पर चल रहे थे. जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती गई, वह एथेरोस्क्लेरोसिस से पीड़ित हो गए, जिसे आमतौर पर धमनियों में पट्टिका के निर्माण के रूप में कहा जाता है. इससे पेट के ऊपरी और निचले हिस्से में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ गईं. इसके अलावा अपर और लोअर लिंब में वाहिकाएं संकुचित हो गईं. ऐसी स्थिति में तत्काल किडनी ट्रांसप्लांट की जरूरत थी.

पुलिस अफसर की पत्नी रेखा मलिक ने अपनी किडनी डोनेट करने की ख्वाहिश जाहिर की. इसके लिए उनकी डिटेल्ड जांच पड़ताल की गई, जिसमें पता चला कि उनकी किडनी फैल गई थी और उसका साइज 20*15 मिमी हो गया था. इसके चलते ट्रांसप्लांट का ये केस और ज्यादा जटिल हो गया.

संकुचित रक्त वाहिकाओं और लोअर लिंब में खून के कम फ्लो के चलते परंपरागत किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी संभव नहीं थी. केस की कंडीशन को देखते हुए डॉक्टरों की टीम ने बहुत ही रेयर किस्म की ट्रांसप्लांट सर्जरी यानी ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई.

किडनी ट्रांसप्लांट करने से पहले मरीज की पत्नी का इलाज किया गया. उनकी किडनी से एन्यूरिज्म को पूरी तरह हटाया गया. क्योंकि मरीज की उदर महाधमनी भी रोगग्रस्त थी, इसलिए पुनरोद्धार के लिए प्लीहा धमनी में वृक्क धमनी को एनास्टोमोज करने की प्लानिंग की गई. मरीज की रीनल वेन डोनर की रीनल वेन के साथ जोड़ा गया. यहां डोनर और मरीज के यूरेटर किडनी के करीब थे.

मैक्स हॉस्पिटल में यूरो-ऑन्कोलॉजी रोबोटिक एंड किडनी ट्रांसप्लांटेशन के चेयरमैन डॉक्टर अनंत कुमार ने इस बारे में बताया, ‘’वैस्कुलर सर्जरी टीम के साथ विचार-विमर्श करने के बाद हमने इस सर्जरी को करने का फैसला किया. इस केस में डोनर और मरीज दोनों की ही किडनी क्रिटिकल कंडीशन में थीं. मरीज की किडनी ट्रांसप्लांट की गई. पेट के निचले हिस्से में व्यापक सर्जरी का इतिहास या पेट के निचले हिस्से की वाहिकाओं की व्यापक विकृति जैसी जटिलताएं, जो नियमित ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी को मुश्किल बना सकती हैं या उच्च जटिलता दर को बढ़ा सकती हैं. ऐसे मामलों में, ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी मरीज के लिए आरामदायक रहती है और ऑपरेशन के बाद उनका जीवन बेहतर तरीके से गुजरता है.

लैप्रोस्कोपी की मदद से मरीज की सफल ऑर्थोट्रॉपिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी की गई. इस पूरी प्रक्रिया में किडनी को मरीज के अंदर ठीक उसी जगह लगाया गया जहां उनकी अपनी किडनी हुआ करती थी. ऑर्थोट्रॉपिक प्रक्रिया में बहुत डीप जाकर सर्जरी की जाती है. जबकि सामान्य हीटरोटॉपिक सर्जरी की प्रक्रिया में किडनी को पेट के बराबर में इंप्लांट किया जाता है.

इस तरह के जटिल ऑपरेशन सिर्फ ज्यादा रिस्क वाले मामलों में किए जाते हैं. इस तरह के किडनी ट्रांसप्लांटेशन एक्सपीरियंस डॉक्टरों के द्वारा ही सफलता के साथ पूरे किए जाते हैं.

किडनी ट्रांसप्लांट की सामान्य सर्जरी में बड़ा कट लगाकर इंप्लांट किया जाता है. जबकि रोबोटिक व लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की प्रक्रिया में बहुत ही छोटा-सा कट लगाकर किडनी ट्रांसप्लांट की जाती है और इसमें किसी मसल को काटने की जरूरत नहीं पड़ती है. सर्जरी के दौरान ब्लड लॉस भी बहुत कम होता है, साथ ही मानवीय गलती होने की आशंका भी काफी कम रहती है.

रिटायर्ड पुलिस अफसर की सफल सर्जरी की गई जिसके 7 दिन बाद उनकी डोनर पत्नी और वो अस्पताल से डिस्चार्ज हो गए. मरीज के शरीर में भी किडनी ट्रांसप्लांट होने के बाद कोई समस्या नहीं हुई.

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